मासिक धर्म महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य और आत्मसम्मान का अहम हिस्सा : डॉ. लता
मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने पर जोर, विद्यार्थियों को दी वैज्ञानिक जानकारी
रायपुर। जनकल्याण मेल। मासिक धर्म महिलाओं के जीवन की एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है। इससे जुड़ी भ्रांतियों, संकोच और झिझक को दूर कर वैज्ञानिक एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता है। यह बात योग विशेषज्ञ एवं इंडियन योगिनी एसोसिएशन की फाउंडर डॉ. आर. एच. लता ने श्री रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी, रायपुर में आयोजित विशेष व्याख्यान में कही।
विश्वविद्यालय के कला संकाय के योग विभाग द्वारा साईराम प्रेक्षा गृह में “मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता, स्वच्छता और समग्र स्वास्थ्य” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। डॉ. लता ने मासिक धर्म को लेकर समाज में प्रचलित सोच और व्यवहार के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि यह एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जिसे सम्मान और सहजता के साथ स्वीकार किया जाना चाहिए। इसके बावजूद समाज के कई हिस्सों में इसे लेकर आज भी संकोच और हीनभावना देखने को मिलती है।
उन्होंने बताया कि भारत के कुछ राज्यों में बालिका को पहली बार मासिक धर्म आने पर इसे उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा है। ऐसे अवसर पर परिवार और समुदाय के लोग बालिका के साथ शामिल होते हैं, उसे उपहार दिए जाते हैं और जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया जाता है। डॉ. लता ने कहा कि इस तरह का सकारात्मक सामाजिक वातावरण बालिकाओं में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि मध्य भारत के कई हिस्सों में पहली बार मासिक धर्म आने पर बालिकाओं में संकोच, शर्म और हीनभावना उत्पन्न हो जाती है। इस सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव आवश्यक है। मासिक धर्म को सहजता और सम्मान के साथ स्वीकार करने से बालिकाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो सकती हैं।
व्याख्यान में डॉ. लता ने मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता, संतुलित पोषण, पर्याप्त जल सेवन, मानसिक स्वास्थ्य, योग और उचित जीवनशैली के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य केवल स्वच्छता तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य, आत्मसम्मान और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे मासिक धर्म से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त करें और समाज में व्याप्त भ्रांतियों एवं अनावश्यक संकोच को दूर करने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में डॉ. निशा, डॉ. मृत्युंजय राठौर एवं डॉ. मंजू ठाकुर ने भी अपने विचार साझा किए और मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम का संचालन योग विभाग की विभागाध्यक्ष एवं भारतीय योगिनी संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राधिका ने किया। उन्होंने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सरल एवं प्रभावी ढंग से विद्यार्थियों के समक्ष रखा।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सौरभ चतुर्वेदी, डीन सहित अन्य अधिकारी एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने मासिक धर्म स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण, योग और जीवनशैली से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से समाधान किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ सामाजिक भ्रांतियों और संकोच को कम कर सम्मान, वैज्ञानिक सोच और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।





