पंचर हुआ सिस्टम या टायर …? स्टेपनी के बिना 108 सेवा, समय पर इलाज न मिलने से मरीज की मौत
एक मरीज की मौत ने 108 सेवा की पोल खोली, बमोरी विधायक ने उठाई कड़ी जांच की मांग

सुमित जैन की रिपोर्टिंग …
गुना [जनकल्याण मेल] जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के कटघरे में खड़ी हो गई है। रविवार को म्याना क्षेत्र के 70 वर्षीय मरीज को जिला अस्पताल लाया जा रहा था, तभी एम्बुलेंस भदौरा के पास पंचर हो गई। हैरानी की बात यह रही कि एम्बुलेंस में स्टेपनी तक मौजूद नहीं थी, जिससे वाहन करीब तीन चौथाई घंटा सडक़ किनारे रुका रहा। इलाज में हुई इस देरी ने मरीज की जान ले ली। घटना के बाद बमोरी विधायक ऋषि अग्रवाल जिला अस्पताल पहुंचे और कड़ी नाराजगी जताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
मिली जानकारी अनुसार म्याना निवासी जगदीश ओझा को दोपहर में अचानक सांस लेने में दिक्कत और बीपी बढऩे की समस्या हुई। परिजनों ने उन्हें म्याना स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया, जहाँ चिकित्सकों ने तत्काल हालत गंभीर बताकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। 108 एम्बुलेंस क्रमांक ष्टत्र 04 हृ 5288 मरीज को लेने म्याना पहुँची और गुना की ओर रवाना हुई। लेकिन भदौरा के पास ही एम्बुलेंस का टायर पंचर हो गया। एम्बुलेंस चालक ने तुरंत टायर बदलने का प्रयास किया, लेकिन वाहन में स्टेपनी ही नहीं थी। ऐसी स्थिति में एम्बुलेंस सडक़ किनारे खड़ी रह गई। लगभग 45 मिनट तक न तो इलाज मिल सका और न ही मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाया जा सका। मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही और आखिरकार एम्बुलेंस में ही दम टूट गया। इसी दौरान दूसरी एम्बुलेंस को बुलाया गया, पर उस समय तक बहुत देर हो चुकी थी। जिला अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने मरीज को मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही बमोरी विधायक ऋषि अग्रवाल और गुना तहसीलदार गौरीशंकर बैरवा अस्पताल पहुँचे। विधायक ने कहा कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि 108 सेवा की नियमित अनदेखी और लापरवाही का परिणाम है। कई बार जिले में चल रही एम्बुलेंसों में ऑक्सीजन सिलेंडर, स्ट्रेचर, जीवन रक्षक दवाएँ या जरूरी उपकरण भी उपलब्ध नहीं होते। अगर एम्बुलेंस में स्टेपनी तक न हो तो यह स्पष्ट है कि वाहन न्यूनतम सुरक्षा और आपातकालीन तैयारी के मानकों पर भी खरा नहीं उतर रहा। तहसीलदार गौरीशंकर बैरवा ने बताया कि मामले की जानकारी कलेक्टर तक पहुँच चुकी है। इस संबंध में जांच दल गठित किया गया है, जो एम्बुलेंस की स्थिति, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल करेगा। जांच के आधार पर आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि 108 एम्बुलेंस सेवा आम लोगों की आपातकालीन जीवन रेखा है। अगर यही सेवा भरोसेमंद न रही तो फिर लोगों को अपनी सुरक्षा किस व्यवस्था से मिलेगी। शहर में यह चर्चा अब तेज है कि स्वास्थ्य विभाग और ठेका संचालित एम्बुलेंस सेवाओं की तत्काल व्यापक निरीक्षण और सुधार की आवश्यकता है, ताकि ऐसी लापरवाही से किसी और की जान न जाए।




