गरोठ तहसील की कुर्सी पर आई रिश्वत की आंच,.बाबू पंकज योगी ने गिराया गरोठ का सम्मान …

गरोठ एसडीओ कार्यालय (राजस्व) में रिश्वत के खेल को उज्जैन लोकायुक्त टीम ने किया उजागर, मचा हड़कंप

(संदीप गुप्ता) 

गरोठ तहसील केवल प्रशासनिक भवन नहीं रही, वह भ्रष्टाचार की चिता बन गई और उस पर बैठा बाबू, जिसकी जेब में जनता का न्याय बिकता था, आज कानून की आग में भस्म हो गया। मंदसौर जिले के गरोठ में लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसने न केवल रिश्वत लेने वाले को पकड़ा,बल्कि उन सड़ी हुई कुर्सियों को भी बेनकाब कर दिया जिन पर बैठकर अधिकारी खुद को राजा समझते आए हैं।

ग्राम साठखेड़ा निवासी दीपक राठौर ने वो कर दिखाया जो पूरे सिस्टम के मुंह पर तमाचा है। उसने न डरकर, न झुककर, न बिककर सीधे पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन अनिल विश्वकर्मा को शिकायती आवेदन सौंपा, जिसमें बताया गया कि एसडीओ कार्यालय गरोठ (राजस्व) में पदस्थ बाबू पंकज योगी प्लॉट डाइवर्सन के नाम पर ₹15,000 की घूस माँग रहा है। यह कोई सुनी-सुनाई बात नहीं थी, यह ज़मीनी सच्चाई थी — और इसे साबित किया गया।

इंस्पेक्टर हिना डाबर को जब सत्यापन का जिम्मा सौंपा गया, तो उन्होंने न किसी दबाव को माना, न डर को। जांच में साफ हो गया कि बाबू ने ₹5000 की पहली रिश्वत की किस्त ले ली थी।

और फिर वो दिन आया जो गरोठ के इतिहास में याद रखा जाएगा 19 जून 2025, समय: दोपहर जैसे ही बाबू पंकज योगी ने रिश्वत ली, लोकायुक्त की टीम दफ्तर में बिजली की तरह गिरी और उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। जिस टेबल पर बैठकर फाइलें रुकती थीं, वहीं अब कानून की हथकड़ी चमक रही थी।

इस कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी राजेश पाठक ने किया, और उनके साथ हिना डाबर, श्याम शर्मा, इसरार, रमेश डाबर, अनिल अटोलिया और उमेश जाटव जैसे जाबांज अधिकारी शामिल रहे। यह पूरी टीम किसी अभियान की तरह नहीं, एक जनक्रांति की तरह आई और रिश्वत के षड्यंत्र को तहस-नहस कर गई।

गिरफ्तारी केवल पंकज योगी की नहीं हुई — बल्कि उन दीवारों की भी हुई जो वर्षों से घूसखोरी की गंध में गुम थीं। एसडीओ कार्यालय गरोठ, जहां हर दिन सैकड़ों नागरिक अपनी अर्जियाँ लेकर आते हैं, आज पहली बार उसी परिसर में न्याय ने रिश्वत की गर्दन मरोड़ी है।

दीपक राठौर की ये आवाज़ अब सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, यह पूरे गरोठ की आवाज़ बन चुकी है। वो चुप्पी जो सालों से सिस्टम से डरती रही, अब दहाड़ बन गई है। अब यह नगर जान चुका है कि रिश्वत माँगने वाला चाहे बाबू हो या अफसर — उसका घमंड, उसकी कुर्सी, उसका तंत्र सब ध्वस्त किया जा सकता है।

आज गरोठ के हर चौराहे, हर पंचायत, हर दफ्तर में एक ही बात हो रही है — “अब रिश्वत नहीं चलेगी, अब जनता जाग गई है।” और यह जागरण रुकने वाला नहीं है। क्योंकि जब तहसील की कुर्सी जलती है, तब सिर्फ बाबू नहीं गिरता सिस्टम का चेहरा बदलता है।

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