प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिवाली पर्व के लिए अपील
निर्धारित मानक के पटाखों का ही निर्माण एवं विक्रय किया जाए

गुना [जनकल्याण मेल] दीपावली प्रकाश का पर्व है परन्तु दीपावली के समय विभिन्न प्रकार के पटाखों का प्रयोग बड़ी मात्रा में किया जाता है। ज्वलनशील एवं ध्वनिकारक पटाखों के उपयोग के कारण परिवेशीय वायु में प्रदूषक तत्वों एवं ध्वनि स्तर में वृद्धि होकर पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार के प्रदूषण पर नियंत्रण किया जाना अत्यंत आवश्यक है। म.प्र.प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि पटाखों का प्रस्फोटन संवेदनशील क्षेत्रों साइलेंस जोन जैसे अस्पताल, नर्सिंग होम, हेल्थ केयर सेंटर, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों इत्यादि से 100 मीटर की दूरी तक प्रतिबंधित हैद्य जिला प्रशासन एवं जिला पुलिस यह सुनिश्चित करेगा कि संवेदनशील क्षेत्रों के 100 मीटर की दूरी तक पटाखों का प्रस्फोटन न हो। ग्रीन पटाखों के अंतर्गत फुलझड़ी, अनार व मेरुन आते हैं। लड़ी (जुडे हुए पटाखों) का निर्माण, उपयोग, विक्रय, वितरण एवं प्रस्फोटन भी प्रतिबंधित हैं। पटाखों की तीव्रता प्रस्फोटन स्थल से 04 मीटर पर 125 डी. बी. (ए) से अधिक नहीं होना चाहिए। पटाखों की ऑनलाईन सेल (जैसे अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, इत्यादि से) प्रतिबंधित हैं। मानकों के अनुरूप निर्धारित ध्वनि स्तर के पटाखों का निर्माण एवं विक्रय की जांच हेतु नमूने एकत्रित कर इनका विश्लेषण पीईएसओ अथवा म.प्र.प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रयोगशालाओं में कराया जा सकता है।
पटाखों के जलने के उपरांत उत्पन्न कचरे को ऐसे स्थानों पर न फेंका जायें जहाँ प्राकृतिक जल स्रोत एवं पेयजल- स्रोत प्रदूषित होने की संभावना हो। पटाखों के जलने के उपरांत बचे हुए कचरें को पृथक स्थान पर एकत्रित किया जाये तथा नगर निगम के कर्मचारियों को सौंपा जाये।





