प्राकृतिक चिकित्सा, योग व आयुर्वेद से संभव है संपूर्ण स्वास्थ्य: व्यावरा में “स्वास्थ्य शिविर” का भव्य आयोजन आज…

ब्यावरा [जनकल्याण मेल]

आज गंभीर और असाध्य माने जाने वाले अनेक रोगों के उपचार के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करना आम हो गया है, लेकिन अब ब्यावरा क्षेत्र में ही आधुनिक एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से स्थायी समाधान की दिशा में सार्थक पहल की जा रही है। इसी क्रम में पीआईटीसी हॉस्पिटल के तत्वावधान में 12 जनवरी 2026 को अग्रवाल धर्मशाला, ब्यावरा (जिला राजगढ़) में एक विशाल निःशुल्क परामर्श एवं चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

शिविर का उद्देश्य दवाओं पर बढ़ती निर्भरता को कम करते हुए प्राकृतिक, आयुर्वेदिक एवं योग आधारित उपचार पद्धतियों के माध्यम से शरीर की आंतरिक शक्ति को जाग्रत करना है। शिविर में पेट से जुड़ी समस्याएं—गैस, एसिडिटी, कब्ज, पुरानी कब्ज, घुटनों व कमर का दर्द, साइटिका, स्लिप डिस्क, महिलाओं से संबंधित रोग (PCOD/PCOS, थायराइड, हार्मोनल असंतुलन), मोटापा एवं मधुमेह जैसी जीवनशैली बीमारियों पर विशेष परामर्श दिया जाएगा।

दवाओं पर निर्भरता से मुक्ति का मार्ग

शिविर से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. मोहित पाटीदार (BNYS) ने बताया कि—

“आज की जीवनशैली में दवाओं पर निर्भरता बढ़ रही है, जबकि नैचुरोपैथी शरीर की प्राकृतिक उपचार शक्ति को सक्रिय कर बिना दुष्प्रभाव के स्वास्थ्य संतुलन बनाए रखने में सहायक है।”

रोग नहीं, रोगी का उपचार करती है समग्र चिकित्सा

डॉ. आकाश बिसोने (BNYS, M.Sc योग) ने कहा—योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में केवल रोग का नहीं, बल्कि संपूर्ण रोगी—शरीर, मन और आत्मा—की चिकित्सा की जाती है। आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ के संतुलन से रोगों का मूल निवारण संभव है।”

पंचतत्वों में छिपा है स्वास्थ्य का रहस्य

प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सिंधुल चौधरी डवास ने कहा कि पंचतत्वों—मिट्टी, जल, धूप, वायु और उपवास—का संतुलित उपयोग जटिल रोगों में भी सकारात्मक परिणाम देता है। उन्होंने इसे काव्यात्मक रूप में भी प्रस्तुत किया।

रोग के मूल कारण पर केंद्रित उपचार

डॉ. जय महाजन (सीनियर मेडिकल ऑफिसर, निसर्गोपचार आश्रम) ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग लक्षणों को दबाने के बजाय रोग के मूल कारण पर कार्य करती है। आहार, प्राणायाम और जीवनशैली सुधार के माध्यम से यह पद्धति सुरक्षित एवं स्थायी समाधान प्रदान करती है।

मोटापा और डायबिटीज में प्रभावी परिणाम

डॉ. नवदीप सक्सेना के अनुसार— प्राकृतिक चिकित्सा, योग और आयुर्वेद का समन्वय मोटापा, मधुमेह और जोड़ों के दर्द जैसे रोगों में प्रभावी सिद्ध हो रहा है, जिससे शरीर भीतर से शुद्ध और सशक्त बनता है।

महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित विकल्प

डॉ. दीक्षा सक्सेना ने कहा कि— महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, मासिक धर्म संबंधी समस्याएं और PCOD/PCOS के उपचार में प्राकृतिक चिकित्सा, योग और आयुर्वेद का मेल सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय है।

उन्होंने संदेश दिया— “जहां प्रकृति ने हर रोग का समाधान दिया है, वहां हानिकारक विकल्पों की आवश्यकता नहीं।”

जनहित में पहल

शिविर का उद्देश्य आमजन को प्राकृतिक, सुरक्षित और समग्र चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है, ताकि लोग रोगों को दबाने के बजाय उनके स्थायी समाधान की ओर अग्रसर हो सकें। आयोजन को लेकर स्थानीय नागरिकों में उत्साह देखा जा रहा है।

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