दूधावानी कांड का नया मोड़: शराब माफिया की बोलेरो तोड़ने का वीडियो हुआ वायरल° पुलिस पर उठे सवाल ..

गजेन्‍द्र सोनी की रिपोर्टिंग 

घोड़ाडोंगरी [जनकल्याण मेल] रानीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दूधावानी गांव में अवैध शराब से भरी बोलेरो वाहन की तोड़फोड़ मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन और स्थानीय शराब ठेकेदारों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि गांव में खड़ी बोलेरो के आसपास महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मौजूद हैं, जबकि बच्चे वाहन के शीशे तोड़ते और बोतलें फोड़ते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि यही वाहन लंबे समय से गांव में शराब की सप्लाई कर रहा था।

रविवार रात जब बोलेरो फिर गांव में दाखिल हुई, तो ग्रामीणों का धैर्य टूट गया। भीड़ ने वाहन को घेर लिया और गुसाईं भी नहीं पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस की कार्रवाई से ग्रामीण असंतुष्ट होते बेकाबू हो गए। पथराव में पुलिस वाहन को भी नुकसान पहुंचा, जिसके बाद पुलिस ने ग्रामीणों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा एवं नुकसान के लिए प्रकरण दर्ज किए हैं।

पुलिस पर मिलीभगत के आरोप ~

घटना के बाद से ही ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों द्वारा पुलिस पर शराब माफिया से मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जिले में शराब परिवहन और बिक्री के अवैध नेटवर्क (सिंडिकेट) के तहत कुछ ठेकेदारों को कथित संरक्षण प्राप्त है।

बताया जा रहा है कि पुलिस कर्मियों द्वारा कार्रवाई करने पर उच्चाधिकारियों से तत्काल दबाव आता है, और कई मामलों में कार्रवाई रोक दी जाती है। सूत्रों के अनुसार, किसी मंत्री का ठेके में कथित साझेदारी होने के कारण भी इस तरह का दबाव बनाए जाने की चर्चा है।

CBI जांच की मांग की तैयारी •••

बैतूल जिले में लगातार बढ़ रहे शराब माफिया और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच अब सामाजिक संगठन इस पूरे मामले को हाईकोर्ट में उठाने की तैयारी में हैं।

संगठनों का कहना है कि दूधावानी कांड जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि जिले में प्रशासनिक तंत्र और माफिया गठजोड़ की निष्पक्ष जांच CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविकता सामने आ सके। और राज्य सरकार की साख बची रहे

दूधावानी कांड अब सिर्फ एक गांव की घटना नहीं रह गई है ● यह जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता और कानून व्यवस्था की साख से जुड़ा मुद्दा बन गया है।

सवाल अब यह है कि —

क्या बैतूल में शराब माफिया और सिस्टम की मिलीभगत की सच्चाई CBI जांच तक पहुंचेगी, या मामला फिर फाइलों में दब जाएगा …?

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