यूनेस्को के दरवाज़ा पर दस्तक देने को आतुर है खट-खट की आवाज

*राष्ट्रीय हथकरघा दिवस* (07 अगस्त 2025)

चन्देरी [जनकल्याण मेल] राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं सहित कहना है कि –नगर के प्रत्येक दूसरे-तीसरे घर में स्थापित हथकरघा पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी अनुभव प्राप्त हुनरमंद बुनकरों के नरम-गरम हाथों से संचालित हथकरघा से निकलती *खट-खट* की आवाज विश्व प्रसिद्ध चंदेरी साड़ियों की बुनाई अर्थात चन्देरी साड़ी निर्मित होने का संकेत देती है।

चौदहवीं सदी से हथकरघा माध्यम से निकालना प्रारंभ हुई चन्देरी की पहचान एवं रोजगार रूपी *खट-खट* की आवाज बड़ी ही शालीनता, शांत स्वभाव से अपने संपूर्ण जीवन यात्रा के गौरवशाली विभिन्न आयामों का, एक नहीं अनेक उतार-चढ़ाव, उन्नति-अवनति का मिश्रित बखान करती नजर आती है।

वह कहती है कि उसने चंदेरी पर राज कर रहे विभिन्न राजवंशों की सफल -असफल नीतियों का किस प्रकार पालन किया है। वह यह भी बताती है कि उसने किस कालखंड में किस प्रकार की मुसीबतों का सामना किया है, वहीं दूसरी ओर वह यह भी दर्शाती है कि किस कालखंड में बुलंदियों के परचम को फहराया है, लेकिन सफल जीवन यात्रा के किसी भी पड़ाव में *खट-खट* की आवाज को नगर में विराम नहीं लगने दिया है।

रेशमी नगर के छोटी-बड़ी पत्थर युक्त गलियों के किनारे स्थित छोटे-बड़े, कच्चे-पक्के बुनकरों के घर-मकानों में कहीं एक, तो कहीं एक से अधिक मौजूद हथकरघा पर पुरुष महिला बुनकरों के द्वारा निर्मित की जा रही मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत चंदेरी साड़ियों को प्रत्यक्ष रूप से निर्मित होते देखना, यह भी देखना कि यह *खट-खट* की आवाज कहां से, क्यों, कैसे और किस प्रकार निकलती है, साथ ही बुनकरों से साड़ियों की बारिकियों विशेषताओं को समझना रोमांचक, सुखद अनुभूति और सुखद स्मृतियां हैं।

इस सुख-दुख भरी दुनिया में आगे हम नहीं होंगे, तो आप भी नहीं होंगे। बावजूद इसके चंदेरी की जीवन रेखा, बुनकरों की जीवित आत्मा, चंदेरी साड़ियों के गौरवमय अतीत का जीता जागता गवाह, हमारी विरासत, हमारी संस्कृति, संस्कार की अमूल्य पूंजी चंदेरी की आन-बान-शान यह हथकरघा हस्तशिल्प कला सफर रूपी *खट-खट* की आवाज यूं ही नगर में गुंजायमान होती रहेगी।

साथ ही *खट-खट* की यह आवाज चन्देरी पर्यटन को बढ़ावा देने में अपने महत्वपूर्ण योगदान के कामयाब सफर को यूं ही जारी रखते हुए संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन United Nations Educational Scientific And Cultural Organization (UNESCO) की स्थाई सूची में अपना नाम सतरंगी अक्षरों में अंकित कराने के प्रयासों को जारी रखेंगी।

*चंदेरी पर्यटन – सुखद स्मृति* 

*एक दिन तो गुजारिए चंदेरी में*

मजीद खां पठान (सदस्य),जिला पर्यटन संवर्धन पपरिषद चंदेरी, जिला अशोकनगर [मध्य प्रदेश]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button