सीआईडी से रवि देशमुख आत्महत्या कांड में बीएमएस यूनियन ने की जांच की मांग …

गजेंद्र सोनी
सारनी [जनकल्याण मेल ] महावीर स्वामी वार्ड क्रमांक 36 के न्यू रिटायरमेंट कॉलोनी में निवास करने वाले कंप्यूटर दुकान एवम बीसी सुसाइटी संचालक रविंद्र देशमुख के आत्महत्या के बाद श्रमिक संगठन भी अब मैदान में खुलकर आते दिखाई दे रही है। बुधवार को कोयलाचल क्षेत्र पाथाखेड़ा की सबसे बड़ी श्रमिक संगठन बीएमएस यूनियन के माध्यम से पुलिस अधीक्षक के नाम पाथाखेड़ा चौकी प्रभारी को ज्ञापन सौपकर इस संपूर्ण मामले की सीआईडी जांच की मांग की गई है।बीएमएस यूनियन के पदाधिकारी चंद्रशेखर भारती ने बताया कि 07 अक्टूबर को रविंद्र देशमुख के माध्यम से अपने आवास पर अवैध देसी पिस्तौल से आत्महत्या कर ली थी इस मामले में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और पत्रकारों का नाम सुसाइड नोट मैं मिलने के बाद या मामला और भी रोचक होता दिखाई दे रहा है उन्होंने बताया कि कोल कामगारों के माध्यम से बीसी सुसाइटी के नाम पर 4 करोड़ से अधिक की राशि लगाई गई थी जो अब कर्मचारियों को मिलने की संभावना दिखाई नहीं दे रही है। उन कर्मचारियों के रुपए डूब जाने की संभावना से नजर अंदाज नहीं किया जा सकता ऐसी स्थिति में वह कोल कर्मचारी जिनके रुपए बीसी और सोसाइटी में लगे हैं उन लोगों के बीच में भी आक्रोश पनपता जा रहा है ऐसी स्थिति को देखते हुए सुसाइड नोट और अवैध पिस्टल से की गई आत्महत्या की सीआईडी जांच की मांग बी एम एस के माध्यम से की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि कंप्यूटर एवं बीसी सोसायटी संचालक रविंद्र देशमुख ने जो आत्महत्या की है वह किस वजह से की है।
बीएमएस की ओर से पुलिस अधीक्षक के नाम पाथाखेड़ा चौकी प्रभारी को ज्ञापन सौंपने वालों में चंद्रशेखर भारती, अशोक सिंह,यासीन खान,रोहन भारती,राजा, राकेश, मनीष,राजेश, सुमित सहित बीएमएस यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रमोद सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
इनका कहना है…
वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड पाथाखेड़ा की भूमिगत खदान में काम करने वाले कई कर्मचारियों की बीसी,सोसाइटी और समिति के नाम पर मृतक अनिल खवसे और रविंद्र देशमुख के पास रुपये थे, वह कामगारों को नहीं दिए जा रहे थे।उनके माध्यम से जो सुसाइड नोट छोड़ा गया है इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए इनके सुसाइड नोट में कई तरह के नाम और 6 पेज का सुसाइड नोट लिखा जाना संदेह को जन्म देता है इस वजह से इस मामले की सीआईडी जांच की जानी चाहिए। इनकी खातो की लेनदेन की भी जाँच होनी चाहिये की कोलकार्मियो के वीसी के पैसे आइपीएल मे तो नही लगे।

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