मैरिज गार्डनों की मनमानी से भेरूंदा ठप: 5 घंटे जाम में कैद रहा नगर, प्रशासन पर उठे सवाल

भेरूंदा [जनकल्याण मेल]

नगर में गुरुवार शाम मैरिज गार्डनों की अव्यवस्थित पार्किंग और प्रशासनिक लापरवाही ने पूरे भेरूंदा को जाम के हवाले कर दिया। इंदौर रोड सहित नगर के प्रमुख मार्गों पर शाम करीब 5 बजे से रात 10 बजे तक भीषण यातायात जाम लगा रहा, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।

नगर में संचालित लगभग 15 मैरिज गार्डनों में से कई में पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं है। गुरुवार को एक साथ कई आयोजनों के चलते सैकड़ों वाहन सड़कों पर खड़े हो गए, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई। सबसे खराब हालात इंदौर रोड और नहर मंडी चौराहे पर रहे, जहां चारों दिशाओं में आधा-आधा किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आधा किलोमीटर का सफर तय करने में वाहन चालकों को एक से डेढ़ घंटे तक का समय लगा।

जाम में फंसे लोगों को घंटों तक भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों तक को राहत नहीं मिल सकी। कई लोग अपनी गाड़ियों में कैद होकर रह गए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मैरिज गार्डन संचालक खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।

जाम की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद यातायात को धीरे-धीरे सुचारू कराया, लेकिन तब तक आम जनता घंटों की परेशानी झेल चुकी थी। नागरिकों का आरोप है कि बिना पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था के मैरिज गार्डनों को अनुमति देना सीधे-सीधे प्रशासनिक विफलता है।

मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुनील गोलिया ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 20 वर्षों से प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद भेरूंदा को अब तक बाईपास नहीं मिल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण नगर में बार-बार जाम की स्थिति बनती है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। गोलिया ने बिना पार्किंग सुविधा वाले मैरिज गार्डनों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

लगातार बिगड़ती यातायात व्यवस्था ने एक बार फिर नगर प्रशासन की तैयारियों और नियमन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी नियम तोड़ने वाले मैरिज गार्डनों पर कार्रवाई करेंगे या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, भेरूंदा के नागरिक भविष्य में ऐसी अव्यवस्था से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

 

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