मातृ शक्ति संगठन की सराहनीय पहल,बिछुड़े बुजुर्ग को अपने परिवार से मिलाया…
परिवार से मिलकर डबडबाई बुजुर्ग पांडुराम की आंखें, झलके महिलाओं के आंसू

प्रदीप खरे द्वारा *** टीकमगढ [जनकल्याण मेल] एक-दो दिन का नहीं आश्रम में मातृ शक्ति संगठन की महिला सदस्यों का पांडुराम के साथ पूरा ढाई महिने का साथ रहा। महिलाओं ने परिवार के बुजुर्ग की भांति ही उनकी सेवाकर उन्हें स्वस्थ्य किया। मानसिक रूप से विक्षिप्त से रहे पांडुराम की सभी महिला सदस्यों की अपने परिवार के सदस्य की तरह सेवा की। धीरे-धीर वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हुए और उन्हें सब कुछ याद आने लगा। जब याद आया, तो उन्होंने अपने गांव और नाम सब बताया। फिर क्या था…सभी महिलाओं ने उन्हें उनके बिछुड़े परिवार से मिलाने की ठान ली। और आखिर एक दिन वह भी आ गया, जब पुलिस की मदद से उनके परिवार को खोज निकाला गया। अपने बीच अपने परिवार को पाकर पांडुराम खुद को रोक न सके और भाबुक होकर रोने लगे। परिवार की आंखों में भी खुशी के आंसू झलकने लगे। बुजुर्ग पांडुराम की अपने परिवार से मुलाकात और खुशी के यह पल महिलाओं की आंखों में आंसू लाने से रोक नहीं सके। उन्होंने सभी मातृ शक्ति सदस्यों का ह्दय से आभार व्याक्त किया। इस संबन्ध में संगठन की अध्यक्ष श्रद्धा चौहान कहती हैं कि संगठन को इस बिछुड़े परिवार को मिलाने की जो खुशी हुई है, उसे बयां कर पाना संभव नहीं है। श्रीमती चौहान कहती हैं कि- इंसान हो तो कुछ करने का इरादा करो, काम ऐसा करो कि साक्षी जमाना बने। आसान नहीं होता सामना करना लहरों का, कम से कम डूबने वाले के लिए किनारा बने। मातृशक्ति संगठन टीकमगढ़ शहर में एक ऐसा संगठन है, जो कई बरसों से मातृ पितृ छाया, वृद्ध आश्रम को संगठन की सभी बहनें बड़े ही सुचारू रूप से संचालित करती आ रही है। बताया गया है कि घटना 25 अक्टूबर 2024 की है, जब हमारे वृद्ध आश्रम पर हंड्रेड डायल द्वारा एक व्यक्ति को रात्रि में 8:50 पर लाया गया। जिनको देखने से उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं लग रही थी और वह कुछ बोल पाने में भी असमर्थ थे। आश्रम में भी वह अकेले ही रहते थे और किसी से कोई बातचीत नहीं करते थे। उनकी देखरेख के साथ-साथ उनका उपचार भी आश्रम में हो रहा था। धीर-धीरे उनकी स्थिति सामान्य होने लगी। वह थोड़ी-थोड़ी बात करने लगे और आश्रम के कामों में भी हाथ बटाने लगे। श्रीमती श्रद्धा चौहान ने बताया कि एक दिन जब हम सभी बहने बैठे थे और उनसे उनके बारे में पूंछ रहे थे, तब वह हम सभी को सत्संग हाल की तरफ ले जाते है और सर्वधर्म सम्भाव की फोटो लगी हुई है, उसमें वो सिक्ख सरदार जी की फोटो पर हाथ रखते है और रोने लगते हैं। तो हम लोगों को लगा कि हो न हो ये सिक्ख सरदार ही है। फिर एक दिन हम लोगों ने उनको पगड़ी ला कर दी और वह पगड़ी को बहुत ही अच्छे तरीके से बांधते हैं , तो यह सिद्ध हो जाता है कि यह सिक्ख ही है। वह कहती हैं कि फिर हम लोग प्रयास करते हैं कि उनको उनके घर तक कैसे पहुंचाया जाए और हम लोगों ने सरदार जी से थोड़ी और बातचीत करी। तो पता चला कि वह हरियाणा में तहसील जाखार गांव चूहपुर के रहने वाले है। तो हम लोगों ने कोतवाली में टीआई पंकज शर्मा से बात की और सारी घटना के बारे में बताया। टीआई श्री शर्मा ने तुरंत ही हरियाणा के थाना जाखार फोन किया तो पता चला जाखर थाने में पांडुराम के नाम की गुमशुदी रिपोर्ट भी थी, तो वो लोग तुरंत ही उनके घर बालों से संपर्क करते हैं। उनके घर वाले हमारे आश्रम के सदस्यों से संपर्क करते और पांडुराम को 8 जनवरी 2025 को लेने आते है । इस दौरान सभी महिला सदस्यों ने उनको नम आंखों से विदा किया। एक ओर जहां उनके परिवार से मिलवाने की सभी को खुशी थी, तो वहीं आश्रम से उनके जाने का सभी को दुख भी हो हुआ। उन्हें विदा करते समय मातृ शक्ति संगठन की अनेक सदस्य मौजूद रहीं।
5 कन्याओं के विवाह में किया था काम …
मातृ शक्ति संगठन द्वारा कुछ दिनों पहले यहां नजरबाग मैदान में 5 कन्याओं का विवाह किया गया। इस भव्य आयोजन में पांडुराम भी मौजूद रहे। उन्होंने भी यहां अपनी सहभागिता दिखाई। उनके चेहरे की खुशी भी देखते ही बन रही थी। उन्होंने इस दौरान भी सभी संगठन की बहिनों की सेवा भावना को मुक्त कंठ से सराहा था। उनकी जिला अस्पताल में भी संगठन की सदस्य श्रीमती सीमा पटैल द्वारा की गई सेवा की चर्चा वहां मौजूद सदस्यों ने खुलकर की।
यह रहे मौजूद …
संगठन की अध्यक्ष श्रीमती श्रद्धा चौहान ने बताया कि पांडुराम को उनके परिवार के साथ विदा करते समय सभी एक ओर जहां खुश थे, वहीं उनके यहां से जाने का दुख भी रहा। वह परिवार के सदस्य की तरह ही रहने लगे थे। उन्हें विदा करते समय यहां उनके जीजाजी मिट्ठू राम, चचेरे भाई गिरीन्दर सिंह, संगठन की सदस्य सीमा पटैल, जया बुंदेला, मधु मिश्रा, संध्या सोनी, स्वाती सिंह आदि मौजूद रहे।
कहा ध्यान रखना अपना, और रो पड़ीं..
रेल्वे स्टेशन पर ट्रेन आते ही अपने परिवार से साथ पांडुराम रेल में फाटक पर खड़े हो गए। मातृ शक्ति संगठन की सदस्य और बुजुर्ग पांडुराम की दशा देखते ही बन रही थी। अपना ध्यान रखना भैया…और इतना कहते ही सदस्यों की आंखें भर आई। स्टेशन पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गई और माहौल गमगीन हो गया। संगठन की बहिनों ने पांडुराम को ढाढस बंधाया और हरियाणा आने का भी वादा किया।



