मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, वैज्ञानिक पशुपालन अपनाने और डेयरी व्यवसाय को सशक्त बनाने पर दिया जोर

सीधी
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को वर्तमान लगभग 9 प्रतिशत से बढ़ाकर आगामी वर्षों में 20 प्रतिशत तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित क्षीर धारा ग्राम योजना के अंतर्गत कलेक्टर विकास मिश्रा ने शनिवार को विकासखंड रामपुर नैकिन के ग्राम भेलकी-820 एवं हर्दिहा का भ्रमण कर पशुपालकों से चौपाल के माध्यम से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने डेयरी गतिविधियों का निरीक्षण करते हुए पशुपालकों की समस्याएं सुनीं तथा विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने पशुपालक जगन्नाथ पटेल, रामकरण पटेल, जगदीश पटेल एवं देवशरण पटेल के डेयरी शेडों का निरीक्षण किया तथा दुग्ध उत्पादन, विपणन एवं उससे प्राप्त आय की जानकारी ली। पशुपालकों ने बताया कि खेती के साथ डेयरी व्यवसाय नियमित एवं स्थायी आय का सशक्त माध्यम बन रहा है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
कलेक्टर ने पशुपालकों से वैज्ञानिक एवं उन्नत पशुपालन अपनाने का आह्वान करते हुए कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन के उपयोग, उच्च नस्ल के पशुओं के संवर्धन, हरे चारे के उत्पादन, संतुलित आहार तथा समय-समय पर टीकाकरण एवं पशु स्वास्थ्य परीक्षण कराने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है और पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
चौपाल के दौरान पशुपालकों ने कुछ बैंकों द्वारा डेयरी ऋण स्वीकृत करने में अनावश्यक विलंब एवं अधिक ब्याज वसूले जाने की समस्या से कलेक्टर को अवगत कराया। इस पर कलेक्टर ने मौके से ही लीड बैंक मैनेजर को सोमवार को क्षेत्रीय अधिकारियों की बैठक आयोजित कर प्रकरणों की समीक्षा करने तथा पात्र पशुपालकों को नियमानुसार ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने बताया कि राज्य शासन द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को ध्यान में रखते हुए आगामी समय में एक महत्वपूर्ण योजना प्रारंभ की जा रही है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक पात्र बच्चे को प्रतिदिन 180 मिलीलीटर दूध निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने पशुपालकों से अधिकाधिक दुग्ध उत्पादन कर दुग्ध संघ से जुड़ने का आग्रह करते हुए कहा कि जिले में उत्पादित दूध का ही सांची दुग्ध संघ के माध्यम से प्रसंस्करण कर बच्चों तक पहुंचाया जाए। इससे स्थानीय पशुपालकों को नियमित बाजार, उचित मूल्य एवं समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा तथा जिले को बाहर से दूध क्रय करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।
उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. आर.के. सोनी ने बताया कि क्षीर धारा अभियान के द्वितीय चरण में ऐसे सभी ग्रामों एवं वार्डों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां लगभग 150 तक मादा गौवंश एवं भैंसवंशीय पशु हैं। विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों एवं मैत्री कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर पहुंचकर पशु पंजीयन, शत-प्रतिशत टीकाकरण, बधियाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन से नस्ल सुधार, नियमित गर्भ परीक्षण, बांझ पशुओं का उपचार, संतुलित पोषण एवं हरा चारा उत्पादन जैसे कार्य प्राथमिकता के साथ किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अभियान का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पशुपालकों की आय में वृद्धि और जिले में डेयरी आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।
भ्रमण के दौरान उपखंड अधिकारी चुरहट अजय शर्मा सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।





