साधु-संतों को मिले अयोध्या की कमान, नेताओं का दखल हो बंद : जयवर्धन सिंह

राम मंदिर दान विवाद को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर साधा निशाना

गुना / जनकल्याण मेल/

पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के पुत्र तथा पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त दान राशि में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्रों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए तथा मंदिरों का संचालन साधु-संतों के हाथों में होना चाहिए।

जयवर्धन सिंह ने कहा कि सनातन धर्म किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा मात्र कुछ दशकों पुरानी राजनीतिक पार्टी है, जबकि सनातन धर्म अनादि काल से चला आ रहा है। राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा और आस्था से दान दिया था। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार ने भी मंदिर निर्माण में सहयोग राशि प्रदान की थी।

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि वर्तमान में राम मंदिर निर्माण से जुड़ी दान राशि और अन्य वित्तीय लेन-देन को लेकर जो खबरें सामने आ रही हैं, वे गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि जिस मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है और जिसकी प्राण-प्रतिष्ठा में देश के प्रधानमंत्री भी शामिल हुए थे, वहां किसी भी प्रकार की आर्थिक अनियमितता या भ्रष्टाचार की आशंका अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

जयवर्धन सिंह ने मांग की कि अयोध्या की पवित्र भूमि पर वर्षों से पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन कर रहे पुराने साधु-संतों को मंदिर संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक संस्थाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप कम होना चाहिए और निर्णय धार्मिक परंपराओं तथा संत समाज की भावना के अनुरूप लिए जाने चाहिए।

उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 में अयोध्या क्षेत्र में भाजपा को मिली हार का उल्लेख करते हुए दावा किया कि स्थानीय पुजारी और संत भाजपा द्वारा लागू किए गए व्यवस्थागत ढांचे से असंतुष्ट थे। इसी असंतोष का असर चुनाव परिणामों में दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और अयोध्या के नाम पर राजनीति करना उचित नहीं है, क्योंकि धर्म और राजनीति दोनों के अपने-अपने अलग क्षेत्र हैं।

जयवर्धन सिंह ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है और इसके संचालन तथा प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

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