गुरुदेव की कृपा और हनुमान जी के आशीर्वाद से मिला नर्मदा स्नान का दिव्य सौभाग्य

बिना मांगे मिला मां नर्मदा का बुलावा, भक्ति और कृपा से सराबोर रहा दिन .. भगवान की अनुपम कृपा का अद्भुत नजारा, नर्मदा स्नान से लेकर भागवत कथा और संत सत्संग तक मिला दिव्य आनंद

सुरेन्द्र मिश्रा 9425381277

भोपाल/जनकल्याण मेल / ईश्वर की कृपा कब, किस रूप में और किस माध्यम से प्राप्त हो जाए, यह कोई नहीं जानता। श्रद्धा, भक्ति और समर्पण से भरे ऐसे ही एक दिव्य दिन का अनुभव रविवार 14 जून को प्राप्त हुआ, जब गुरुदेव के सान्निध्य, भगवान श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान जी की कृपा से पूरा दिन आध्यात्मिक आनंद और ईश्वरीय अनुभूतियों से परिपूर्ण रहा

श्राद्ध अमावस्या के पावन अवसर पर प्रातःकाल गुरुदेव महाराज की आरती, पूजा, सत्संग और भजन-कीर्तन में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। दोपहर में शाहपुरा निवासी अग्रवाल परिवार द्वारा ब्राह्मण सम्मान कार्यक्रम में सुरेन्द्र मिश्रा एवं संध्या मिश्रा को सादर आमंत्रित किया गया। परिवार ने अत्यंत प्रेम और श्रद्धा के साथ भोजन कराकर तिलक लगाया तथा सम्मान स्वरूप भेंट सामग्री प्रदान की।

इसके पश्चात भागवत कथा में शामिल होकर जीवन को सार्थक बनाने वाले आध्यात्मिक संदेशों का श्रवण किया। कथा स्थल पर बरसती वर्षा के बीच इंद्रदेव की कृपा का भी भरपूर आनंद प्राप्त हुआ। शाम को प्रभु स्मरण करते हुए विश्राम किया ही था कि सोमवार प्रातः अचानक मोबाइल की घंटी बजी। फोन पर राम अग्रवाल जी की उत्साहपूर्ण आवाज सुनाई दी “जय श्रीराम मिश्रा जी, नर्मदा स्नान के लिए नर्मदापुरम चलना है, आप तैयार हो जाइए 

यह सुनकर मन आनंद से भर उठा। सोमवती अमावस्या, मिथुन संक्रांति, पुरुषोत्तम मास और सेवा कार्यों से जुड़ी शुभ सूचनाओं के बीच नर्मदा स्नान का यह अप्रत्याशित निमंत्रण किसी दिव्य आह्वान से कम नहीं था। हमने तुरंत प्रभु को प्रणाम कर धन्यवाद दिया कि बिना किसी योजना और अपेक्षा के उन्होंने मां नर्मदा के दर्शन और स्नान का अवसर प्रदान किया।

नर्मदापुरम पहुंचकर मां नर्मदा के पावन तट पर स्नान, पूजन और दर्शन का सौभाग्य मिला। ऐसा अनुभव हुआ मानो मां नर्मदा स्वयं यह संदेश दे रही हों कि जो भगवान से सच्चा प्रेम करता है, उसे जीवन में बहुत कुछ बिना मांगे ही प्राप्त हो जाता है। यह भारतीय संस्कृति की वही सनातन परंपरा है, जहां श्रद्धा का प्रतिफल कृपा के रूप में मिलता है।

नर्मदापुरम आते-जाते मार्ग में अपने इष्टदेव श्री हनुमान जी को बार-बार दण्डवत प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आज दोपहर में पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त होगा तथा संध्या 6 बजे गुरुदेव महाराज के दरबार में उपस्थित होकर आरती, पूजा और संत सत्संग का आनंद लिया जाएगा।

हम सपरिवार प्रभु श्रीराम, पवनपुत्र हनुमान जी, गुरुदेव महाराज और मां नर्मदा के प्रति हृदय से कृतज्ञ हैं। अधिकमास में सेवा, साधना और सत्संग के जो अवसर प्राप्त हो रहे हैं, वे ईश्वर के विशेष आशीर्वाद का ही परिणाम हैं। प्रभु की कृपा यूं ही बनी रहे और सभी के जीवन में सुख, शांति, भक्ति एवं सद्बुद्धि का प्रकाश फैलता रहे, यही प्रार्थना है।

एक बार तो ईश्वर की शरण में आकर देखिए फिर देखिए उनकी कृपा…

जय श्री राम 

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