नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ना समय की आवश्यकता : पूनम कुलकर्णी

कुंकुमार्चन और पर्यावरण संरक्षण के संग मिला संस्कृति संवर्धन का संदेश... अधिक मास के अनुष्ठानों ने जगाई आस्था की अलख, महिलाओं ने लिया संस्कृति संरक्षण का संकल्प

सुरेन्द्र मिश्रा – 9425381277

भोपाल /जनकल्याण मेल/

सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखने वाले पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के पावन अवसर पर कोलार स्थित श्री अथर्वशीर्ष मंडल द्वारा पूरे माह विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों का संकल्प लेकर समाज में भक्ति, संस्कार और सामाजिक एकता का प्रेरणादायक संदेश दिया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्रीयन समाज के परिवारों, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर धार्मिक अनुष्ठानों का लाभ प्राप्त किया। 

माहभर चले कार्यक्रमों का शुभारंभ 17 मई को सामूहिक विष्णु पवमान अभिषेक से हुआ। दिलीप कुलकर्णी, श्रीकृष्ण आठले, अब श्री पटवर्धन के आचार्यत्व में सम्पन्न इस आयोजन में 25 दम्पत्तियों ने भाग लेकर भगवान विष्णु का अभिषेक एवं पूजन किया। कार्यक्रम के संयोजक अमृत हलवे एवं पं. नितीन अवसरकर द्वारा निःशुल्क पूजन सामग्री तथा महाप्रसाद की व्यवस्था की गई। इसी अवसर पर साहित्य क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए साहित्य संग महामंडल के उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम स्प्रे का सम्मान भी किया गया।

22 मई को महिलाओं द्वारा सामूहिक कुंकुमार्चन का आयोजन किया गया, जिसमें 25 महिलाओं ने माता महालक्ष्मी की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की। कार्यक्रम का सफल संचालन पूनम कुलकर्णी के संयोजन में हुआ।

28 मई को सामूहिक सत्यनारायण भगवान कथा एवं पूजन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें 35 दम्पत्तियों ने सहभागिता की। वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न इस आयोजन का संचालन गुरुजी अमित अभ्यंकर एवं पं. नितीन अवसरकर ने किया। इसी अवसर पर परशुराम बोर्ड के अध्यक्ष विष्णु राजोरिया का सम्मान भी किया गया।

29 मई को राजश्री वालवेकर के निवास पर 35 महिलाओं द्वारा सामूहिक कुंकुमार्चन आयोजित किया गया। इसके पश्चात 3 जून को संकष्ट चतुर्थी के अवसर पर माधव जोशी के निवास पर सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से अथर्वशीर्ष पाठ का सहस्रावर्तन कर आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया।

विश्व पर्यावरण दिवस एवं अधिक मास के विशेष संयोग पर 5 जून को जानकी अपार्टमेंट परिसर में श्री अथर्वशीर्ष मंडल एवं श्रीरंग नृत्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सामूहिक कुंकुमार्चन का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में 35 महिलाओं एवं छात्राओं ने भाग लिया। मुख्य अतिथि बृहन्महाराष्ट्र मंडल की राष्ट्रीय सचिव पूनम कुलकर्णी ने इस अवसर पर बृहन्महाराष्ट्र मंडल की राष्ट्रीय सचिव पूनम कुलकर्णी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराएं केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे परिवार, समाज और राष्ट्र को जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों की भी जानकारी होना आवश्यक है। यदि बच्चे बचपन से ही परिवार के साथ पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक गतिविधियों में सहभागी बनेंगे तो उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन और पाबरिवारिक जिम्मेदारियों का विकास होगा।

पूनम कुलकर्णी ने कहा कि अधिक मास जैसे आध्यात्मिक अवसर हमें आत्मचिंतन, सेवा, भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं। ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करते हैं तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। पूनम कुलकर्णी ने महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि परिवार और संस्कृति के संरक्षण में मातृशक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

श्रीरंग नृत्यालय कल्चरल एवं वेलफेयर सोसाइटी की संचालिका मांडवी आरोणकर ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए महिलाओं को तुलसी के पौधे वितरित किए तथा वृक्षारोपण एवं प्रकृति संरक्षण का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण दोनों मिलकर मानव जीवन को संतुलित एवं समृद्ध बनाते हैं।

मंडल के पदाधिकारियों ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के दौरान प्रत्येक शुक्रवार सामूहिक कुंकुमार्चन का संकल्प लिया गया है। इसी श्रृंखला का अगला आयोजन 12 जून को आयोजित होगा।

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