महाविद्यालय में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश, एक लाख की रिश्वत लेते बाबू गिरफ्तार

प्रदीप खरे …
टीकमगढ़ / जनकल्याण मेल/ लंबे समय से सुर्खियों में बने स्थानीय पीजी कॉलेज में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर आखिरकार लोकायुक्त की कार्रवाई ने बड़ा खुलासा कर दिया। मंगलवार को लोकायुक्त टीम ने कॉलेज के बाबू नितिन मिश्रा को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। कार्रवाई के बाद महाविद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों तथा आम लोगों के बीच भ्रष्टाचार को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता देवेन्द्र बाल्मीकि ने लोकायुक्त से शिकायत की थी कि उनके पिता हरिकिशन बाल्मीकि, जो कॉलेज में स्वीपर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, उनके एरियर, अर्जित अवकाश और समयमान वेतनमान के भुगतान की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में बाबू नितिन मिश्रा द्वारा दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। साथ ही देवेन्द्र को नौकरी दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे गए थे।
बताया गया कि रिश्वत की पहली किश्त 7 मई को दी जा चुकी थी। मंगलवार को दूसरी किश्त के रूप में एक लाख रुपये देते समय लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाकर आरोपी बाबू को रंगे हाथों पकड़ लिया।
कार्रवाई का नेतृत्व लोकायुक्त निरीक्षक कमल सिंह ने अपनी टीम के साथ किया। अचानक हुई इस कार्रवाई से कॉलेज प्रशासन में खलबली मच गई। मौके पर मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि इतनी बड़ी रकम का लेन-देन केवल एक बाबू तक सीमित नहीं हो सकता। मामले में अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
शिकायतकर्ता ने प्राचार्य सहित कुछ अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता के भी आरोप लगाए हैं। उल्लेखनीय है कि कॉलेज में पूर्व से ही नियुक्तियों और अन्य प्रशासनिक कार्यों में गड़बड़ियों तथा पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। कई बार तत्कालीन प्राचार्य एवं कर्मचारियों द्वारा अपने परिजनों को लाभ पहुंचाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
अब देखना यह होगा कि लगातार विवादों में बने इस महाविद्यालय की छवि सुधारने के लिए शासन और प्रशासन क्या ठोस कदम उठाते हैं।





