धार्मिक नगर चंदेरी को ‘पवित्र नगर’ घोषित किए जाने की पुरज़ोर मांग …
बहुधार्मिक आस्था, पुरातन परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत केंद्र है चंदेरी – डॉ. अविनाश जैन

सुरेन्द्र मिश्रा चंदेरी वाले मो. 9425381277, 7999576775
[ चन्देरी जनकल्याण मेल ]

धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण ऐतिहासिक नगर चंदेरी को “पवित्र नगर” घोषित किए जाने की मांग तेज़ हो गई है। इस संबंध में समाजसेवी एवं धर्मप्रेमी नागरिक डॉ. अविनाश कुमार जैन ने शासन-प्रशासन एवं समस्त जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि चंदेरी की पुण्य धरा को उसके धार्मिक महत्व के अनुरूप विशेष दर्जा प्रदान किया जाए।
डॉ. जैन ने कहा कि चंदेरी नगर प्राचीन काल से ही विविध धर्मों, संप्रदायों और संस्कृतियों का संगम रहा है। यहां हिंदू, जैन और मुस्लिम धर्मों के ऐतिहासिक एवं पूज्य स्थल न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि आपसी सौहार्द और सामाजिक समरसता के भी प्रतीक हैं। ऐसे में चंदेरी को पवित्र नगर घोषित करना न केवल न्यायोचित, बल्कि ऐतिहासिक आवश्यकता भी है।
हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र
डॉ. जैन ने बताया कि चंदेरी पवित्र धार्मिक भूमि पर बसा नगर है, जहां स्वयं प्रकट मां जागेश्वरी देवी शक्तिपीठ संपूर्ण क्षेत्र में विशेष आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विराजमान है।
इसके साथ ही परमेश्वर तालाब, जिसके चमत्कारी जल से कीर्तिपाल का कुष्ठ रोग दूर हुआ था, और ऐतिहासिक श्री लक्ष्मण जी मंदिर नगर की धार्मिक गरिमा को और सुदृढ़ करते हैं।
जैन धर्म की वैश्विक पहचान

चंदेरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध दिगंबर जैन चौबीसी मंदिर, खंदारगिरी क्षेत्र, प्राचीन पार्श्वनाथ मंदिर एवं चंद्रप्रभ भगवान मंदिर (हाटकापुरा) विश्वभर से जैन श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं और नगर को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पहचान प्रदान करते हैं।
मुस्लिम आस्था के ऐतिहासिक केंद्र
नगर में स्थित क्षेत्र की सबसे विशाल जामा मस्जिद, मख्दूम शाह विलायत दरगाह एवं झिंझरयारे पीर जैसे स्थल चंदेरी की गंगा-जमुनी तहज़ीब और धार्मिक सहिष्णुता के सशक्त प्रमाण हैं।

अन्य प्रमुख धार्मिक एवं प्राकृतिक सिद्ध स्थल
चंदेरी में ऐतिहासिक नृसिंह मंदिर, नवग्रह शनि मंदिर, फुहारी जी मंदिर, माता हरसिद्धि देवी मंदिर, तथा विभिन्न समाजों द्वारा स्थापित दर्जनों प्राचीन मंदिर नगर की धार्मिक विविधता को दर्शाते हैं।
इसके साथ ही सकल कुड़ी धाम, मेघासन मंदिर, मालन खोह, पनख्वाह जी, कठौती खोह, कातिया की दांत, हथिनी खोह, पिपर खोह जैसे प्राकृतिक सिद्ध स्थल आध्यात्मिकता और प्रकृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं।

पवित्र नगर का दर्जा : भविष्य की दिशा
डॉ. अविनाश कुमार जैन ने कहा कि चंदेरी को पवित्र नगर घोषित करने से—आने वाली पीढ़ियों को मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक दिशा मिलेगीधार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा स्थानीय रोजगार, व्यापार और हस्तशिल्प को नया संबल मिलेगा राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक संरक्षण को मजबूती मिलेगी
उन्होंने समस्त जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे इस पुण्य कार्य के लिए सामूहिक पहल करें और चंदेरी की ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक गरिमा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करें।





