चार घंटे की प्रतीक्षा भी बनी भक्ति का हिस्सा गोविंदा-गोविंदा के जयघोष संग तिरुपति बालाजी दर्शन को रवाना हुआ दल

भोपाल [जनकल्याण मेल]।

तिरुपति बालाजी के पावन दर्शन को लेकर बीते एक माह से चल रही तैयारियों का फल आखिरकार उस दिन मिला, जब श्रद्धालुओं का दल भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंचा। उत्साह, भक्ति और आस्था से भरे मन के साथ यात्री समय से पहले स्टेशन पहुंचे, परंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था। निर्धारित समय पर चलने वाली “हमसफर एक्सप्रेस” लगभग चार घंटे की देरी से भोपाल पहुंची।

हालांकि इस लंबे इंतजार में भी श्रद्धा का रस कम नहीं हुआ। प्लेटफॉर्म पर बीता हर पल किसी अनुभव से कम नहीं था। भोपाल स्टेशन की चहल-पहल देखते ही बनती थी।कोई अपने गंतव्य की तैयारी में, कोई अपनों से बतियाता हुआ, तो अधिकांश यात्री मोबाइल में व्यस्त नजर आए। वहीं कुछ महिलाएं और बुजुर्ग अपने-अपने घर-परिवार की कथाएं साझा करते हुए समय को सहजता से काटते दिखे। प्रतीक्षा भी जैसे इस धार्मिक यात्रा का अभिन्न अंग बन गई।

अंततः वह क्षण भी आया, जब प्लेटफॉर्म नंबर एक के इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड पर कोच नंबर झिलमिलाने लगे। यात्रियों में नई ऊर्जा का संचार हो गया। उत्सुकता के साथ सभी अपने-अपने आरक्षित कोच की ओर बढ़े। डिब्बे में प्रवेश कर निर्धारित सीट पर विराजमान होते ही चेहरों पर संतोष और राहत की मुस्कान खिल उठी।

ट्रेन के चलने के साथ ही जयकारों का स्वर गूंज उठा—“गोविंदा… गोविंदा…”। चार घंटे का इंतजार अब एक मधुर स्मृति बन चुका था और आगे का सफर भक्ति, विश्वास और आनंद से भर उठा। तिरुपति बालाजी के दर्शन की अभिलाषा लिए यह यात्रा केवल दूरी तय करने का साधन नहीं, बल्कि आस्था और आत्मिक उल्लास की अनुपम अनुभूति बन गई। इटारसी आते ~आते हम सबने मिलकर भोजन का आनंद लिया ।

🌻 सुरेन्द्र मिश्र

भोपाल [जनकल्याण मेल]

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