67वें अखिल भारतीय कालिदास समारोह: नृत्य, शोध और व्याख्यानों से गूंजा उज्जैन
वैदेही पंड्या के जयपुर घराने नृत्य से चतुर्थ दिवस का भव्य आगाज, कालिदास के संदेशों ने किया प्रेरित

उज्जैन [जनकल्याण मेल] 67वें अखिल भारतीय कालिदास समारोह के चौथे दिन ने कला, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा का अनुपम संगम रचा। सुश्री वैदेही पंड्या के मनमोहक शास्त्रीय नृत्य से शुभारंभ हुआ, जिसमें जयपुर घराने की बाजुबंद की लड़ी, अंग संचालन, भावभंगिमाएं, थाट, तिहाइयां और चक्करदार तत्वों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह प्रस्तुति कालिदास की काव्य रचना से प्रेरित होकर सांस्कृतिक धरोहर की जीवंत झलक पेश की।

शोध संगोष्ठी के तृतीय दिवस में मुख्य अतिथि हिमांजय पालिवाल (अध्यक्ष, गुजरात संस्कृत बोर्ड, सोमनाथ), सारस्वत अतिथि प्रो. सदाशिव द्विवेदी (वाराणसी) और अध्यक्ष प्रो. कौशलेन्द्र पाण्डे (वाराणसी) की उपस्थिति में 10 शोध पत्रों का वाचन हुआ। विषयों में मालविकाग्निमित्रम् में स्वभाव विमर्श (डॉ. संजय यादव, नई दिल्ली), आदर्श परिवार चिंतन (डॉ. प्रियंका द्विवेदी, सोमनाथ), मेघदूतम् में स्वात्म गौरव भाव विमर्श (डॉ.अशोक कुमार विष्णौई, ग्वालियर) आदि शामिल थे। अन्य शोधकर्ताओं में डॉ. महेशचंद्र शर्मा, डॉ. शुभम शर्मा, डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, श्री सत्यम शुक्ल, डॉ. प्रतिक्षा सोनी शर्मा और डॉ. पूजा उपाध्याय प्रमुख रहे। निदेशक डॉ. गोविंद गंधे ने प्रस्तावना और स्वागत भाषण दिया, संचालन श्री दुर्गाशंकर सूर्यवंश ने किया तथा आभार डॉ. संदीप नागर ने व्यक्त किया। मुख्य अतिथि ने समारोह को कला-संस्कृति का सवाहक बताते हुए कहा कि यह केवल आयोजन नहीं, बल्कि ज्ञान परंपरा का उत्सव है।
व्याख्यानमाला में महाकवि कालिदास स्मृति व्याख्यान ‘कालिदास का स्वात्म गौरव’ प्रो. केदारनारायण जोशी (उज्जैन) ने दिया, जिसकी अध्यक्षता प्रो. विजय कुमार मेनन (पूर्व कुलगुरु, महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय) ने की। विशेष व्याख्यान में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्र (डबलिन, आयरलैंड) ने ऑनलाइन ‘विकसित भारत संकल्प के परिप्रेक्ष्य में कालिदास का महत्व’ पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कालिदास के ग्रंथों में लोकतंत्र, प्रशासन और गुप्त मंत्रणा के सूत्र आज भी प्रासंगिक हैं, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल में हैं। कालिदास का संदेश है —सब विजयी हों, सब प्रसन्न रहें, विद्या-लक्ष्मी का संयोग हो और कार्यों से महानता प्राप्त हो। सायंकाल सांस्कृतिक संध्या में नृत्य नाटिका ‘ऋतुसंहार’ (सांस्कृतिक समिति, उज्जैन) और ‘श्रीकृष्ण उज्जयिनी’ (विषाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति) की प्रस्तुतियां हुईं। प्रथम में तनिषा जैन एवं समूह, द्वितीय का निर्देशन जगरुप सिंह ने किया। मुख्य अतिथि नगर निगम सभापति कलावती यादव, विशिष्ट अतिथि पद्मश्री भगवतीलाल राजपुरोहित, अध्यक्षता भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने की। संचालन डॉ. केतकी त्रिवेदी और आभार अनिल बारोड ने किया, जबकि अतिथि स्वागत डॉ. गोविंद गंधे ने। यह दिवस कालिदास की विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले गया।
