जेल में बंद रामवीर की मुश्किलें और बढ़ीं, पुलिस ने आत्महत्या दुष्प्रेरण मामले में किया पुन: गिरफ्तार …
मामला वर्ष 2015 का है, जब माखन कुशवाह निवासी ललितपुर (उ.प्र.) की रूठियाई क्षेत्र में जलने से मौत हो गई थी।
सुमित जैन…

गुना [जनकल्याण मेल] पहले से ही कई संगीन मामलों में जेल में बंद बर्खास्त उपनिरीक्षक रामवीर सिंह कुशवाह की परेशानियाँ कम होने का नाम नहीं ले रहीं। पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी के निर्देशन में गुना पुलिस ने उनके खिलाफ धरनावदा थाना क्षेत्र में 10 साल पुराने आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के प्रकरण में फिर से गिरफ़्तारी करते हुए उन्हें पुनः न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने सुनवाई के बाद आरोपी को फिर से न्यायिक हिरासत में चांचौड़ा उपजेल भेजने का आदेश दिया।
मामला वर्ष 2015 का है, जब माखन कुशवाह निवासी ललितपुर (उ.प्र.) की रूठियाई क्षेत्र में जलने से मौत हो गई थी। उस समय मामले को मर्ग में लेकर सामान्य जांच की गई थी, लेकिन बाद में मामला संदिग्ध परिस्थितियों में सामने आया। इसके बाद वर्ष 2019 में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अप.क्र. 473/19 धारा 306 भादवि में मामला दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने पाया कि घटना के समय धरनावदा थाना प्रभारी रहे रामवीर सिंह कुशवाह की इस पूरे मामले में पूर्ण संलिप्तता थी।
इसी आधार पर पुलिस ने प्रकरण में धारा 201, 203, 204, 218, 193, 342, 120(बी) सहित अन्य धाराओं का इजाफा किया। चूंकि आरोपी पहले से ही चांचौड़ा उपजेल में न्यायिक अभिरक्षा में बंद था, इसलिए पुलिस ने कोर्ट की अनुमति लेकर उसकी फॉर्मल गिरफ्तारी की। इसके बाद उसे सोमवार को राघौगढ़ न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे पुनः जेल भेज दिया गया। एसपी अंकित सोनी ने कहा कि “यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश है कि कानून से ऊपर कोई नहीं। गुना पुलिस विभाग के भीतर भी किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी।” रामवीर सिंह के खिलाफ इससे पहले भी हत्या, अपहरण, एससी-एसटी एक्ट और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े कई गंभीर प्रकरण दर्ज हैं, जो उनकी आपराधिक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
अपराधी अगर वर्दी में भी हो तो बख्शा नहीं जाएगा- रामवीर के अपराधो पर ग्वालियर आईजी का सख्त बयान
इधर इस मामले में ग्वालियर रेंज के आईजी अरविंद सक्सेना ने मंगलवार को गुना में मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट कहा कि कानून के दायरे में अपराध करने वाला चाहे किसी भी विभाग में रहा हो, उसे अपराधी की तरह ही ट्रीट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस कृतसंकल्पित है और पीडि़तों को न्याय दिलाने के लिए हर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आईजी सक्सेना ने कहा कि बर्खास्त एसआई रामवीर सिंह पर दर्ज प्रकरण केवल आत्माराम पारदी हत्याकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पर गवाहों को धमकाने, धोखाधड़ी करने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वाहन पंजीकरण कराने जैसे गंभीर आरोप हैं। आईजी ने बताया कि रामवीर द्वारा उपयोग की गई डस्टर वाहन को ऐसे व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत कराया गया था, जो वास्तविक रूप से उस पते पर रहता ही नहीं था। इस आधार पर धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में भी उसकी गिरफ्तारी की गई है। इस मामले में पूर्व में उसे रिमांड पर भी लिया जा चुका है। आईजी सक्सेना ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पहले पीडि़त रहा हो और भयवश आगे नहीं आ पाया हो, तो वह अब सामने आए। उन्होंने आश्वस्त किया कि पुलिस उन्हें भयमुक्त वातावरण देगी और उनकी शिकायतों पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा अगर कोई व्यापारी, नागरिक या गवाह यह कहता है कि उस पर दबाव बनाया गया, तो बीएनएस की उपयुक्त धाराओं में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अपराध चाहे किसी का भी हो, कानून के सामने सब बराबर हैं। मीडिया द्वारा दस वर्ष से अधिक समय पूर्व एएसआई मोहब्बत सिंह की संदिग्ध आत्महत्या के मामले में कार्रवाई की मांग पर भी आईजी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण को भी पुन: परीक्षण में लिया जाएगा और यदि किसी प्रकार की लापरवाही पाई गई, तो उस पर भी उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



