एम्स भोपाल में ब्रेन डेड युवक के अंगदान से पाँच मरीजों को मिला नया जीवन

सुरेन्द्र मिश्रा जनकल्याण मेल,भोपाल [मध्यप्रदेश]

1. एम्स भोपाल में 37 वर्षीय ब्रेन डेड मरीज द्वारा हार्ट, दो किडनी और दो कॉर्निया दान किए जाने से पाँच मरीजों को नया जीवन मिला।

2. मरीज का हार्ट 41 वर्षीय मरीज में प्रत्यारोपित किया गया, जो एम्स भोपाल का तीसरा हार्ट ट्रांसप्लांट था।

3. एक किडनी का प्रत्यारोपण एम्स भोपाल में 30 वर्षीय मरीज में किया गया, दूसरी किडनी बंसल अस्पताल भेजी गई, साथ ही दो कॉर्निया से दो मरीजों को दृष्टि मिलेगी।

4. एम्स भोपाल के इतिहास में दूसरी बार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया सीधे ऑपरेशन थियेटर (ओटी) में की गई, जिससे अंग निष्कर्षण समय पर और विधिसम्मत रूप से संभव हो सका।

5. इस हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए आर्थिक सहायता माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और एम्स भोपाल द्वारा प्रदान की गई।

6. अंगदान के उपरांत मुख्यमंत्री द्वारा घोषित प्रोटोकॉल के अनुसार पुलिस दल एवं एम्स भोपाल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जो समाज में अंगदान के प्रति सम्मान और जागरूकता का प्रतीक रहा।

7. इस प्रक्रिया को सफल बनाने में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसियोलॉजी, नेत्र रोग, फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी सहित अंग निष्कर्षण और प्रत्यारोपण में जुड़ी सभी टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समर्थन, एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर एवं उपनिदेशक श्री संदेश जैन के नेतृत्व में एम्स भोपाल प्रशासन ने 37 वर्षीय मरीज के अंगों का सफलतापूर्वक निष्कर्षण किया। इसके अतिरिक्त, डीन (अकादमिक्स) डॉ. रजनीश जोशी और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विकास गुप्ता का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन रहा। यह मरीज सिर में गंभीर चोट लगने के बाद एम्स भोपाल में भर्ती किया गया था। मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी, जिसके बाद चिकित्सकों की टीम ने विस्तृत परीक्षण किया। चार चिकित्सकों की टीम—ने दो बार छह घंटे के अंतराल पर जांच की। इसके बाद मरीज को ब्रेन डेड घोषित किया गया।

परिजनों ने मानवीय आधार पर अंगदान की सहमति दी, जिसके पश्चात अंग निष्कर्षण की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। रविवार सुबह 6:30 बजे अंगों की निकासी (हार्वेस्टिंग) शुरू की गई, जिसके बाद प्रत्यारोपण की प्रक्रियाएँ की गईं। ब्रेन डेड मरीज के हार्ट को 41 वर्षीय मरीज में प्रत्यारोपित किया गया। यह एम्स भोपाल में किया गया तीसरा हार्ट ट्रांसप्लांट (हृदय प्रत्यारोपण) था। इस प्रत्यारोपण के लिए आर्थिक सहायता मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव और एम्स भोपाल द्वारा प्रदान की गई। हार्ट ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ता वर्तमान में आईसीयू में हैं और अगले 48 घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिनमें उनकी स्थिति पर चिकित्सकों द्वारा निरंतर निगरानी रखी जा रही है।

एक किडनी का प्रत्यारोपण एम्स भोपाल में 30 वर्षीय मरीज में किया गया, जबकि दूसरी किडनी बंसल अस्पताल के लिए भेजी गई। यह एम्स भोपाल में किया गया 16वाँ सफल किडनी प्रत्यारोपण था। इसके अतिरिक्त, दो कॉर्निया भी नेत्र रोग विभाग की टीम द्वारा प्राप्त किए गए, जिनसे दो मरीजों को दृष्टि प्रदान की जाएगी। चूँकि मामला चिकित्सकीय-वैधानिक (मेडिकोलीगल) प्रकृति का था, इसलिए मृत्यु के कारण की पुष्टि हेतु पोस्टमार्टम किया जाना आवश्यक था। एम्स भोपाल के इतिहास में दूसरी बार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया सीधे ऑपरेशन थियेटर (ओटी) में की गई, जो एक अभिनव और विधिसम्मत पहल थी।

अंगदान की इस प्रक्रिया के उपरांत, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में घोषित प्रोटोकॉल के अनुसार पुलिस दल एवं एम्स भोपाल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। यह भावनात्मक क्षण समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता और सम्मान का प्रतीक रहा। इस प्रक्रिया को सफल बनाने में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसियोलॉजी, नेत्र रोग, फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी सहित अंग निष्कर्षण और प्रत्यारोपण में जुड़ी सभी टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

एम्स भोपाल की यह ऐतिहासिक उपलब्धि संस्थान की उन्नत चिकित्सा क्षमता, दक्ष टीम वर्क और अंगदान जागरूकता के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह कार्य एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर—के मार्गदर्शन में संभव हो पाया, जिन्होंने जीवन रक्षक अंगदान संस्कृति को बढ़ावा देने में निरंतर नेतृत्व प्रदान किया।

 

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