तंबू तानकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे तहसीलदार और नायब तहसीलदार

पूरे जिले का राजस्व तंत्र ठप, बाढ़ सर्वे भी अटका

गुना [जनकल्याण मेल] जिले में बुधवार से तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने तंबू तानकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। गुना जिला मुख्यालय पर तहसील कार्यालय के सामने लगे इस तंबू में अधिकारी विरोध स्वरूप डटे हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार द्वारा थोपे गए अव्यवहारिक कार्य विभाजन के निर्णय के खिलाफ यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उसे पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता। खास बात यह है कि एक दिन पहले ही जिले के सभी तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने कलेक्टर किशोर कन्याल को ज्ञापन सौंपकर इस हड़ताल की सूचना दी थी। हड़ताल का सीधा असर जिले की सभी तहसीलों के राजस्व कामकाज पर पड़ा है। जमीन के नामांतरण, बंटवारे, सीमांकन, फसल बीमा, भू-अर्जन जैसे महत्वपूर्ण मामलों में कामकाज पूरी तरह ठप हो चुका है। सबसे गंभीर बात यह है कि हाल ही में जिले में आई भीषण बाढ़ के बाद चल रहे सर्वे कार्य भी पूरी तरह अटक गए हैं। कई गांवों में मकानों और फसलों को पहुंचे नुकसान का मूल्यांकन लंबित है, जिससे प्रभावित परिवारों को राहत मिलने में देरी होगी।

न्यायिक और फील्ड वर्क के नए बंटवारे से नाराज 

मध्य प्रदेश कनिष्ठ राजस्व अधिकारी संघ द्वारा बुलाई गई इस हड़ताल का मुख्य कारण राज्य सरकार की नई कार्य प्रणाली है, जिसमें तहसीलदारों को दो वर्गों में बांटा गया है। एक वर्ग को केवल न्यायिक कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि दूसरा वर्ग सिर्फ फील्ड वर्क करेगा। इस विभाजन को संघ ने अव्यवहारिक, असंवैधानिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद नुकसानदायक बताया है। संघ का कहना है कि जिन अधिकारियों को फील्ड में तैनात किया गया है, उन्हें आवश्यक स्टाफ और संसाधन तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। वहीं न्यायिक कार्य देख रहे अधिकारियों पर भी काम का अत्यधिक बोझ है। ऐसी स्थिति में दोनों प्रकार के कार्यों का निष्पादन प्रभावित हो रहा है।

पूरे जिले की तहसीलों में पसरा सन्नाटा

हड़ताल के पहले ही दिन जिले की सभी तहसीलों गुना, राघौगढ़, बमोरी, मधुसूदनगढ़, आरोन और कैंट – में कामकाज ठप रहा। कार्यालयों में जनता दस्तावेज लेकर घंटों इंतजार करती रही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। न कोई पेशी हुई, न सीमांकन के लिए अधिकारी फील्ड पर निकले। इससे आमजन के जरूरी कार्य भी अटक गए हैं।

बाढ़ प्रभावितों को मुआवजे में होगी देरी

हाल ही में आई बाढ़ से जिले के कई गांव प्रभावित हुए हैं। इन क्षेत्रों में मकान, दुकानें और फसलें बह गईं या बर्बाद हो गईं। प्रशासन द्वारा इनका सर्वे कर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन तहसीलदारों की हड़ताल से यह प्रक्रिया रुक गई है। अब ग्रामीणों को राहत मिलने में देरी हो सकती है।

ऑफिसियल व्हाट्सएप गु्रप छोड़े

राजस्व अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे रहेंगे। वे सिर्फ आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को ही प्राथमिकता देंगे। इसके अलावा उन्होंने अपने शासकीय वाहन जमा कराने, डिजिटल सिग्नेचर डोंगल सीलबंद कर जिला अध्यक्ष को सौंपने और ऑफिसियल व्हाट्सएप गु्रप छोडऩे का ऐलान किया है।

ज्ञापन में रखी गईं मुख्य मांगे और कार्यक्रम …

इस दौरान संघ ने तहसीलदारों के न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों में विभाजन की योजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने, राजस्व न्यायालयों को मर्ज करने की प्रक्रिया रोकने, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत अधिकारियों को आवश्यक संसाधन और स्टाफ उपलब्ध कराने की मांग की। वहीं यदि फील्ड कार्यों को प्राथमिकता दी जानी है, तो कार्यपालिक शक्तियों को पुलिस या सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपा जाए। सभी तहसीलदार, नायब तहसीलदार जिला मुख्यालय पर रहकर आपदा प्रबंधन को छोडक़र अन्य समस्त कार्यों से विरत रहे। वहीं अधिकारी अपने शासकीय वाहन और डिजिटल डोंगल संबंधित अधिकारियों को जमा किए। इस दौरान तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार प्रतिदिन शाम 6 बजे स्थापना शाखा में उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

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