4 दिन में सेंसेक्स 4,000 अंक उछला, शेयर बाजार की तेजी के पीछे क्या हैं 5 बड़े कारण?

मुंबई
शेयर मार्केट में इन दिनों रौनक है. होर्मुज का टेंशन वहीं है, तेल की कीमतें अभी भी 100 के आसपास हैं. डोनाल्ड ट्रंप के मनमानी फैसले सामने हैं, फिर भी सेंसेक्स उड़ान भर रहा है. उड़ान ऐसी वैसी नहीं, 4 दिन में भारतीय शेयर बाजार ने 4000 से ज्यादा अंकों की छलांग लगाई है. सोमवार के बाद मंगलवार को भी बाजार 1200 प्वाइंट से ज्यादा उछला. वहीं, निफ्टी भी 275 पॉइंट उछलकर 23,716 पर आ गया. 8 सितंबर 2026 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब निफ्टी ने 23,700 का आंकड़ा पार किया है. आखिर ये पैसा आ कहां से रहा है? क्या ये तेजी टिकाऊ है?
बाजार में अचानक आई इस तेजी के पीछे कोई एक वजह नहीं. कई अच्छी खबरों ने मिलकर यह माहौल बनाया है. एक ओर क्रूड के रेट 8 फीसदी नीचे आ गए हैं. तो दूसरी ओर अमेरिका- चीन में एआई का बबल फूटने से भारतीय आईटी कंपनियों की चांदी है. पिटने के बाद विदेशी निवेशक अब भारत की ओर रुख कर रहे हैं. सरकार भी उनके लिए रास्ता आसान कर रही है. खुद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिया कि कैपिटल गेन टैक्स खत्म किया जा सकता है. नतीजा, विदेशी निवेश भारत लौटने लगे हैं. चंद दिनों में विदेशी निवेशकों ने 2.28 बिलियन डॉलर भारतीय मार्केट में लगाए हैं. हम आपको उन सारे फैक्टर के बारे में बता रहे हैं, जिनका इंम्पैक्ट शेयर मार्केट पर हुआ है।
सस्ता कच्चा तेल
शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी संजीवनी बनकर आया है कच्चा तेल. मंगलवार को कच्चे तेल के दाम अचानक 8 फीसदी तक नीचे आ गए. एक्सपर्ट के मुताबिक- कारोबारियों को लग रहा कि यूएस मिडटर्म इलेक्शन के बाद ट्रंप ईरान पर कोई बड़ा एक्शन नहीं लेंगे. कतर दोनों देशों के बीच बातचीत करवा रहा है. इससे शांति की उम्मीद बंधी है. बाजार को लगता है कि तेल सस्ता होगा तो भारत में महंगाई कम होगी, और महंगाई कम होगी तो बाजार का झूमना तय है।
एआई का बुलबुला फूटा
पिछले कुछ सालों से पूरी दुनिया में ‘AI’ यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का खूब हो हल्ला था. चीन अमेरिका और यूरोप के निवेशकों ने एआई के नाम पर आंख मूंदकर पैसा लगाया. उन्हें लगा कि यह तकनीक रातों-रात सब कुछ बदल देगी. लेकिन अब यह एआई का गुब्बारा फूटता हुआ नजर आ रहा है. लोगों को समझ आ रहा है कि हर काम सिर्फ मशीनों या एआई के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. एआई का यह तिलिस्म टूटने का सबसे बड़ा फायदा भारत की आईटी कंपनियों को हो रहा है. विदेशी कंपनियों का भरोसा अब वापस भारत की उन मजबूत कंपनियों पर लौट रहा है जो सालों से उनका काम संभाल रही हैं. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार भी मानते हैं कि एआई ट्रेड का कमजोर होना भारतीय बाजार की इस ताजा रैली को और तेज कर रहा है।
विदेशी सेठों की वापसी और आईपीओ का क्रेज
शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) जमकर खरीदारी कर रहे हैं. अकेले मंगलवार को उन्होंने 3,114 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया. ट्रस्टलाइन होल्डिंग्स के संस्थापक अरुणगिरी एन ने बताया कि अक्टूबर में विदेशी निवेशकों ने भले ही पुराने शेयरों से 5 अरब डॉलर निकाल लिए हों, लेकिन उन्होंने नई कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाना बंद नहीं किया. 23 अक्टूबर तक उन्होंने आईपीओ में करीब आधा अरब डॉलर का निवेश किया. इसका सीधा मतलब है कि विदेशी लोगों को भारत की नई कंपनियों पर पूरा भरोसा है।
कैपिटल गेन टैक्स खत्म होने की सुगबुगाहट
एक और खबर ने बाजार को हवा दी. शेयर बाजार से होने वाले मुनाफे पर जो कैपिटल गेन टैक्स लगता है, उसके खत्म होने के आसार दिख रहे हैं. टैक्स का हटना निवेशकों के लिए वैसा ही है जैसे किसानों की फसल पर लगने वाला लगान माफ कर दिया जाए. अगर ये टैक्स खत्म होता है, तो निवेशकों की जेब में सीधा मुनाफा जाएगा, जिससे वो बाजार में और ज्यादा पैसा लगाएंगे।
मजबूत रुपया और कंपनियों की मोटी कमाई
जब कच्चा तेल सस्ता होता है और बाहर से डॉलर देश में आता है, तो हमारा रुपया मजबूत होने लगता है. विदेशी बाज़ार में डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे मजबूत होकर 94.72 पर पहुंच गया है. रुपया मज़बूत होने से देश को बाहर से सामान मंगाने में कम पैसा खर्च करना पड़ता है. इसके अलावा, भारत की अपनी कंपनियां भी बेहतरीन मुनाफा कमा रही हैं. जब कंपनियों के तिमाही नतीजे अच्छे आते हैं, तो उनके शेयर भी भागते हैं. रिलायंस जैसी विशाल कंपनी के शेयर में एक ही दिन में 11.6 फीसदी का उछाल देखा गया, जो कि बहुत दुर्लभ बात है. इसी तरह, मैरिको नाम की कंपनी का शेयर 4.5 फीसदी चढ़ गया क्योंकि कच्चा नारियल (कोपरा) सस्ता होने से कंपनी का मुनाफा बढ़ गया और बाज़ार में उनके उत्पादों की मांग भी अच्छी रही।
एक्सपर्ट टेक- क्या यह तेजी टिकाऊ है?
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर बाजार ने मनीकंट्रोल से बातचीत में बाजार की इस चाल को समझाया. उन्होंने कहा, निफ्टी ने बहुत मजबूती के साथ शुरुआत की और 23,582 के आंकड़े को पार कर लिया. यह दिखाता है कि बाजार के अंदरूनी हालात सुधर रहे हैं. अगर बाजार में खरीदारी ऐसे ही चलती रही और निफ्टी 23,600 के ऊपर टिका रहा, तो यह जल्द ही 23,800 से 24,000 की मंजिल तय कर सकता है. गिरावट की स्थिति में बाजार के लिए 23,500 से 23,450 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट जोन का काम करेगा. अगर कोई बुरी खबर नहीं आती है और बाज़ार इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तो तेजी का यह दौर आगे भी जारी रहेगा।





