युगधारा का पारिवारिक वन विहार समारोह संपन्न कविता, गीत, ग़ज़ल, दोहे और बाँसुरी वादन ने बांधा समां
उदयपुर। जनकल्याण मेल। साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक मंच युगधारा द्वारा अमरख महादेव के सुरम्य प्रांगण में पारिवारिक वन विहार समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता युगधारा अध्यक्ष प्रकाश तातेड़ ने की। मुख्य अतिथि प्रीता भार्गव तथा विशिष्ट अतिथि घनश्याम आर्य, मनमोहन मधुकर एवं डॉ. राजगोपाल ‘राज’ रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. शीतल श्रीमाली द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना एवं मनमोहन मधुकर के युगधारा संस्था गीत से हुआ। समारोह का संचालन डॉ. निर्मला शर्मा ‘नीलोफर’ ने किया। युगधारा के संस्थापक डॉ. ज्योतिपुंज ने आयोजन की जानकारी दी, जबकि महासचिव श्याम मठपाल ने आभार व्यक्त किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रकाश तातेड़ ने अतिथियों एवं सदस्यों का स्वागत करते हुए युगधारा की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने युगधारा के सदस्यों को समर्पित प्रमोद सनाढ्य की रचना का काव्य पाठ भी किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी सदस्यों ने अपना परिचय दिया।
काव्य गोष्ठी रही आकर्षण का केंद्र

वन विहार समारोह में आयोजित काव्य गोष्ठी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उदयपुर शहर सहित बाहर से आए 50 से अधिक कवियों एवं शायरों ने कविता, गीत, ग़ज़ल, दोहे, छंद एवं भजनों की प्रस्तुतियां दीं। श्रृंगार, वीर और हास्य रस से सजी प्रस्तुतियों ने वातावरण को जीवंत बना दिया। तालियों की गड़गड़ाहट और हंसी के ठहाकों से पूरा परिसर गूंज उठा।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि कवि-कवयित्रियों के साथ आए उनके परिवार के सदस्यों ने भी प्रेरित होकर काव्य पाठ में सहभागिता की।
इस अवसर पर डॉ. सिम्मी सिंह ने ‘मेवाड़ को जानो’ विषय पर रोचक प्रश्नोत्तरी आयोजित की। उपस्थित सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विजेताओं ने पुरस्कार प्राप्त किए। वहीं विनोद उपाध्याय ने बाँसुरी वादन की मनमोहक प्रस्तुति दी। बाँसुरी की मधुर स्वर लहरियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
काव्य गोष्ठी में लोकेश चौबीसा, सुभाष अग्रवाल, डॉ. शंकर लाल शर्मा, बंशीलाल लुहार, डॉ. कुंजन आचार्य, डॉ. कल्पना आचार्य, कुमार हरीश ‘अमित’, शाहिद हुसैन शैदा, कुसुम भारद्वाज, दक्षेश पानेरी, नंदिनी शर्मा, अशोक जैन ‘मंथन’, मुकेश परवाना, मधु सहगल, शाहिदा शौकत, मीनाक्षी नागदा, सुदेश चौधरी, रजनीकांत मनावत, रामपाल सोनी, डॉ. भरत सिंह राव, पूनम भू ‘पूनम’, शकुंतला सोनी, गोविंद लाल शर्मा, अनुराधा शर्मा, राजेश शर्मा, रियाज़ अहमद कंधारी, उमर फारूक ‘ओमान’, राजकुमारी, प्रो. निर्मल गर्ग, आर.के. शर्मा, साबिरा रानी, गुलज़ार चित्तौड़गढ़ी, पुष्पा देवी श्रीमाली, मीनाक्षी पारीक, विनोद उपाध्याय, मनमोहन मधुकर, डॉ. राजगोपाल ‘राज’, डॉ. सिम्मी सिंह, डॉ. निर्मला शर्मा, घनश्याम आर्य एवं श्याम मठपाल सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
समारोह ने साहित्य, संस्कृति और पारिवारिक सहभागिता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करते हुए उपस्थित जनों को यादगार अनुभव प्रदान किया।





