औषधीय उद्यान बना आयुर्वेदिक ज्ञान और जनजागरूकता का केंद्र
विशेषज्ञों ने औषधीय पौधों की पहचान, गुण एवं पारंपरिक उपयोग की दी जानकारी
सुरेन्द्र मिश्रा 9425381277 भोपाल। जनकल्याण मेल।
आयुर्वेद में औषधीय पौधों का विशेष महत्व है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा औषधीय उद्यान विद्यार्थियों, शोधार्थियों के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी उपयोगी शैक्षणिक एवं जनजागरूकता केंद्र के रूप में आकार ले रहा है। उद्यान में विभिन्न औषधीय पौधों को संरक्षित कर उनके नाम, पहचान, गुण एवं उपयोग से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

औषधीय उद्यान के निरीक्षण के दौरान डॉ. के.सी. गर्ग, विभागाध्यक्ष द्रव्यगुण, डॉ. नितिन मारवाह, विभागाध्यक्ष स्वस्थवृत्त, डॉ. नेहा प्रजापति, व्याख्याता द्रव्यगुण तथा डॉ. पल्लवी कोडले, एमडी छात्रा ने जनकल्याण मेल को विभिन्न औषधीय पौधों की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि भारतीय परंपरा में अनेक पौधों का उपयोग स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं में किया जाता रहा है और इनके बारे में वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से जानकारी का प्रसार आवश्यक है।
विद्यार्थियों और आमजन के लिए उपयोगी
उद्यान में लगे पौधों की पहचान और उनके गुणों की जानकारी विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक अध्ययन का माध्यम बन रही है। वहीं आम नागरिक भी यहां विभिन्न औषधीय वनस्पतियों को प्रत्यक्ष रूप से देखकर उनके पारंपरिक महत्व को समझ सकते हैं। इस प्रकार उद्यान को शैक्षणिक, संरक्षण एवं जनजागरूकता की गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

उद्यान के संरक्षण एवं व्यवस्थाओं में चिकित्सकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है। इस कार्य में श्री संदीप मालवीय एवं श्री राकेश, गार्डन कर्मचारी की भूमिका भी उल्लेखनीय है।
विशेषज्ञों की सलाह — स्वयं उपचार से बचें
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि किसी औषधीय पौधे की पहचान हो जाने मात्र से उसका सेवन या उपचार के रूप में उपयोग करना उचित नहीं है। किसी भी जड़ी-बूटी अथवा औषधीय पौधे का सेवन रोग, मात्रा, आयु और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से ही किया जाना चाहिए।

जनकल्याण मेल की पहल का उद्देश्य ऐसे औषधीय उद्यानों और आयुर्वेदिक ज्ञान को आम नागरिकों तक पहुंचाना है, ताकि लोग प्रकृति में उपलब्ध वनस्पतियों के महत्व को समझें और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक हों। विशेषज्ञों के अनुसार, हमारी पारंपरिक जीवनशैली और रसोई में प्रयुक्त अनेक वनस्पतियों के औषधीय महत्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समझना आज भी उपयोगी है।





