खड़े हनुमान को हटाने के बजाय तलाशें दूसरा रास्ता : संत समाज

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच मंदिर को लेकर बढ़ी हलचल, प्रशासन ने कहा- सहमति के बिना नहीं हटेगी प्रतिमा

वासुदेव दुबे

उज्जैन/जनकल्याण मेल/ सिंहस्थ-2028 के लिए प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण के बीच खड़े हनुमान मंदिर को लेकर मामला गरमा गया है। प्रतिमा को हटाए जाने की चर्चाओं के बीच संत समाज ने प्रशासन से वैकल्पिक समाधान तलाशने की अपील की है। गुरुवार को महामंडलेश्वर और संतों ने मंदिर पहुंचकर दर्शन किए, हनुमान चालीसा का पाठ किया और प्रतिमा को यथास्थान सुरक्षित रखने की मांग की।

महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी महाराज, पंडित शंकर लक्ष्मीनारायण जोशी, साध्वी हर्षानंद गिरी रिछारिया, महामंडलेश्वर अतुलेशानंद गिरी तथा महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी सहित अन्य संतों ने मंदिर पहुंचकर अपनी भावना व्यक्त की।

पंडित शंकर लक्ष्मीनारायण जोशी ने कहा कि सिंहस्थ के विकास और सड़क चौड़ीकरण के कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए मंदिर हटाना ही एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने नीलगंगा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां चिमनी और मंदिर को सुरक्षित रखते हुए सड़क निर्माण का विकल्प निकाला गया है। इसी तरह खड़े हनुमान जी के लिए भी तकनीकी और व्यावहारिक विकल्प तलाशा जाना चाहिए।

साध्वी हर्षानंद गिरी ने कहा कि विकास के नाम पर धार्मिक आस्था से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संत समाज से भी खड़े हनुमान जी की आस्था के पक्ष में खड़े होने का आह्वान किया।

मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने कहा कि प्रतिमा और उसके आधार की वास्तविक स्थिति की विशेषज्ञों से जांच कराए बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। प्रतिमा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

बिना सहमति नहीं हटेगी प्रतिमा : प्रशासन

प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रतिमा को हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है तथा बिना संबंधित पक्षों की सहमति के प्रतिमा हटाने की कार्रवाई नहीं की जाएगी। प्रतिमा की संरचनात्मक स्थिति का वैज्ञानिक परीक्षण कराने और विशेषज्ञों की राय लेने के बाद ही आगे की दिशा तय की जाएगी।

इधर अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल ने प्रतिमा हटाने के विरोध में शुक्रवार दोपहर 1 बजे मंदिर स्थल पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपने की घोषणा की है।

अब पूरा मामला तकनीकी जांच, प्रशासन-संत समाज के संवाद और वैकल्पिक सड़क मार्ग की संभावनाओं पर टिका है। संत समाज की मांग है कि सिंहस्थ का विकास भी हो और खड़े हनुमान जी की आस्था भी सुरक्षित रहे।

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