निजी जमीन पर बनी सड़क ने बढ़ाई बीडीए कॉलोनी घरौंदा की चिंता …

सीमांकन के बाद सामने आया मामला, सलैया से घरौंदा होते हुए हिनोतिया आलम जाने वाले मार्ग की वैधानिक स्थिति पर उठे सवाल

सुरेन्द्र मिश्रा 9425381277

भोपाल। जनकल्याण मेल।

सलैया गांव से बीडीए कॉलोनी स्थित प्यारेलाल खंडेलवाल आवासीय परिसर (घरौंदा) होते हुए हिनोतिया आलम की ओर जाने वाले वर्षों पुराने पहुंच मार्ग की वैधानिक स्थिति को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तहसील न्यायालय के सीमांकन आदेश के बाद सामने आई स्थिति में सड़क का एक हिस्सा निजी भूमि पर निर्मित होना बताया जा रहा है। ऐसे में संबंधित भूमि स्वामी द्वारा भविष्य में तार फेंसिंग किए जाने पर घरौंदा सहित आसपास की कई आवासीय कॉलोनियों के हजारों रहवासियों के आवागमन पर संकट खड़ा हो सकता है।

मामला सलैया स्थित खसरा नंबर 147 की 0.1700 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार न्यायालय नायब तहसीलदार, बैरागढ़ वृत्त, तहसील कोलार द्वारा 15 जून 2026 को पारित आदेश में संबंधित भूमि का सीमांकन विधि अनुसार किए जाने की पुष्टि की गई है। इससे सड़क निर्माण और संबंधित भूमि के वास्तविक स्वामित्व को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।

2017-18 से इसी रास्ते से हो रहा आवागमन…

भोपाल विकास प्राधिकरण द्वारा सलैया गांव के समीप प्यारेलाल खंडेलवाल आवासीय परिसर/अफोर्डेबल हाउसिंग योजना के तहत घरौंदा विकसित किया गया। कॉलोनी में आने-जाने के लिए सलैया गांव की पुलिया से होते हुए भूमि आवासीय परिसर के सामने से लगभग 10 फीट चौड़ी सीसी सड़क बनाई गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2017-18 से इस मार्ग का लगातार उपयोग हो रहा है।

समय के साथ यही मार्ग घरौंदा के अलावा आसपास की अन्य आवासीय कॉलोनियों के लिए भी महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग बन गया। वर्तमान में बड़ी संख्या में लोग इसी रास्ते से सलैया और अन्य क्षेत्रों की ओर आवागमन करते हैं।

जमीन मालिक की आपत्ति के बावजूद बना रहा सड़क का उपयोग …

स्थानीय जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार संबंधित भूमि स्वामी द्वारा निजी जमीन पर सड़क बनाए जाने को लेकर पहले भी आपत्ति जताई जाती रही। इसके बावजूद सड़क का निर्माण हुआ और आवागमन जारी रहा। बाद में विद्युत विभाग ने भी इसी मार्ग पर बिजली के खंभे स्थापित कर दिए।

भूमि स्वामी हरिनारायण पाटीदार, पिता मदनलाल पाटीदार, निवासी सलैया द्वारा अपनी भूमि के सीमांकन के लिए तहसील न्यायालय में आवेदन किया गया। राजस्व निरीक्षक द्वारा 11 मई 2026 को संबंधित पक्षों को सूचना दी गई और 18 मई को मौके पर सीमांकन की कार्रवाई की गई। सीमांकन प्रक्रिया में पंचनामा, सूचना पत्र, नक्शा और प्रतिवेदन सहित संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए।

इसके बाद न्यायालय ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 129(4) के तहत सीमांकन प्रक्रिया विधि अनुसार होने की पुष्टि की।

निजी जमीन में सड़क मिलने के बाद बीडीए की भूमिका पर सवाल…

सीमांकन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ है कि यदि सड़क का हिस्सा निजी भूमि में निर्मित पाया गया है तो बीडीए ने सड़क निर्माण किस आधार पर कराया था …?

क्या सड़क निर्माण से पहले संबंधित भूमि का अधिग्रहण, हस्तांतरण अथवा अन्य कोई वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई थी..? वर्ष 2017-18 में सड़क निर्माण के समय राजस्व रिकॉर्ड में भूमि की स्थिति क्या थी…? बीडीए के पास सड़क निर्माण के लिए कौन-सा दस्तावेज या स्वामित्व का आधार मौजूद था…? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों के रिकॉर्ड के परीक्षण से ही सामने आ सकता है।

बिजली के खंभे लगाने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में…

सड़क बनने के बाद विद्युत विभाग द्वारा इसी मार्ग पर बिजली के खंभे लगाए गए। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि विद्युत विभाग ने खंभे लगाने के लिए संबंधित भूमि को किस आधार पर सड़क अथवा शासकीय भूमि माना।

यदि सीमांकन में सड़क निजी भूमि पर निर्मित होना सामने आया है तो सड़क निर्माण के साथ-साथ बिजली के खंभे लगाने की प्रक्रिया और उस समय उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड की भी जांच आवश्यक हो जाती है।

जमीन मालिक ने कहा- जनहित में फिलहाल रास्ता खुला रखा है …

संबंधित जमीन के मालिक एवं पूर्व सरपंच ने जनकल्याण मेल को बताया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए फिलहाल रास्ता खुला रखा गया है। भविष्य में जमीन पर तार फेंसिंग कराई जाएगी। उनका कहना है कि बीडीए द्वारा उनकी जमीन में सड़क बनाई गई और बाद में विद्युत विभाग ने भी बिजली के खंभे लगा दिए, जबकि उनके स्तर से इस संबंध में लगातार विरोध जताया जाता रहा।

यदि भविष्य में तार फेंसिंग कर रास्ता बंद किया जाता है तो इसका सीधा असर घरौंदा सहित आसपास की आवासीय कॉलोनियों के रहवासियों पर पड़ सकता है।

रास्ता बंद हुआ तो 500 मीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी…

वर्तमान मार्ग बाधित होने की स्थिति में घरौंदा के साथ मुकुंदरत्नम, शिव आंगन, केनाल किंगशिप सहित आसपास के अनेक रहवासियों को श्रीपरिसर के सामने से निकलकर तेरस शटर मार्केट पार करते हुए वैकल्पिक मार्ग से जाना पड़ेगा। इससे उनके आवागमन की दूरी लगभग 500 मीटर तक बढ़ सकती है।

इस स्थिति में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को उठानी पड़ सकती है।

आखिर सरकारी सड़क की जमीन कहां है…?

पूरे मामले का सबसे अहम सवाल यह है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड में आम रास्ते अथवा सड़क के लिए भूमि निर्धारित है तो वह जमीन मौके पर कहां है…? क्या निर्धारित शासकीय भूमि पर किसी व्यक्ति का कब्जा है…? क्या सड़क निर्माण के लिए निर्धारित भूमि उपलब्ध होने के बावजूद निजी भूमि पर सड़क बना दी गई…? अथवा राजस्व नक्शे और मौके की स्थिति में कोई अंतर है…?

इन सवालों का जवाब राजस्व विभाग, बीडीए और विद्युत विभाग के रिकॉर्ड के संयुक्त परीक्षण से ही स्पष्ट हो सकता है।

प्रशासन कराए संयुक्त जांच, स्थिति हो स्पष्ट …

रहवासियों का कहना है कि मामला केवल निजी भूमि के सीमांकन तक सीमित नहीं है। यह हजारों लोगों के आवागमन, सरकारी भूमि की सुरक्षा और वर्षों से उपयोग किए जा रहे रास्ते के भविष्य से जुड़ा विषय है।

ऐसे में प्रशासन को राजस्व नक्शे, खसरा रिकॉर्ड, बीडीए के भूमि एवं सड़क निर्माण संबंधी दस्तावेज और विद्युत विभाग के रिकॉर्ड का संयुक्त परीक्षण कराना चाहिए। आवश्यकता होने पर मौके का पुनः सीमांकन कराकर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सड़क की वास्तविक भूमि कौन-सी है और सरकारी रास्ते के लिए निर्धारित भूमि की वर्तमान स्थिति क्या है।

लापरवाही सामने आए तो जिम्मेदारी भी तय हो…

यदि जांच में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे तत्काल कब्जामुक्त कराकर आम रास्ते को बहाल किया जाना चाहिए। वहीं यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, गलत रिपोर्ट अथवा बिना वैधानिक प्रक्रिया के कारण निजी भूमि पर सरकारी सड़क का निर्माण हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।

फिलहाल सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सड़क किसकी जमीन पर बनी है। बड़ा सवाल यह है कि बीडीए कॉलोनी घरौंदा और आसपास के हजारों रहवासियों के लिए वर्षों से इस्तेमाल हो रहे इस रास्ते का वैधानिक विकल्प क्या है और यदि वर्तमान मार्ग बंद होता है तो प्रशासन उनकी आवागमन व्यवस्था कैसे सुनिश्चित करेगा…?

जब तार फेंसिंग होगी तो तेरह शटर मार्केट से गुज़रेगा ट्रेफिक -नया मार्केट बन जाने के कारण यहां पहले से ही भीड़ बनी रहती है यदि उक्त आवासीय परिसर का ट्रेफिक इस तरफ मोड़ा तो आगे चलकर चौराहे पर जाम लगना शुरू हो जायेगा।

अब निगाहें प्रशासन की संयुक्त जांच और इस मार्ग की वास्तविक राजस्व स्थिति स्पष्ट किए जाने पर टिकी हैं।

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