बीडीए कॉलोनी घरौंदा में आवारा पशुओं संग ‘कुत्तों का राज’, दहशत में बच्चे-बुजुर्ग
घरौंदा में जहां- तहां लगे कचरे के ढेर और खुले आवासीय परिसर ने बढ़ाई समस्या, चौक-चौराहों पर झुंड बनाकर घूम रहे कुत्ते और आवारा पशु रहवासियों का सवाल - किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों ...? बीडीए-नगर निगम और पुलिस संयुक्त रूप से करें कार्रवाई

सुरेन्द्र मिश्रा…9425381277
भोपाल। जनकल्याण मेल।
राजधानी के सलैया क्षेत्र स्थित प्यारेलाल खण्डेलवाल आवासीय परिसर, बीडीए कॉलोनी घरौंदा में इन दिनों आवारा कुत्तों और पशुओं की बढ़ती संख्या रहवासियों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई है। कॉलोनी की गलियों, चौक-चौराहों और खुले स्थानों पर कुत्तों के झुंड घूमते नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर गाय, सांड और उनके बच्चे भी जगह-जगह डेरा जमाए रहते हैं। हालात ऐसे हैं कि बच्चों और बुजुर्गों को अकेले आने-जाने में डर लगने लगा है।
रहवासियों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो किसी दिन कुत्तों या आवारा पशुओं के कारण बड़ा हादसा हो सकता है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए अचानक सड़क पर आ जाने वाले कुत्ते और पशु खतरा बने हुए हैं।
कचरे के ढेर बने आवारा पशुओं का ‘भोजन केंद्र’…
घरौंदा में आवारा कुत्तों और पशुओं की बढ़ती संख्या के पीछे कचरा प्रबंधन की बदहाल व्यवस्था को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। रहवासियों के अनुसार नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ी के आने का कोई स्पष्ट और नियमित समय नहीं है। कई बार लोगों को पता ही नहीं चलता कि वाहन कब आया और कब चला गया।
इसके चलते घरों में जमा कचरा कई बार सड़क किनारे अथवा खुले स्थानों पर पहुंच जाता है। कुछ स्थानों पर खिड़कियों से कचरा बाहर फेंकने और आवागमन के दौरान सड़क किनारे कचरा डालने की शिकायतें भी हैं। यही कचरा कुत्तों और अन्य आवारा पशुओं के लिए भोजन का आसान स्रोत बन गया है। कचरे के आसपास दिनभर आवारा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है।
सुबह घर खाली, गलियों में बच्चे और बुजुर्ग…
घरौंदा में बड़ी संख्या में निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवार निवास करते हैं। अनेक परिवार किराये के मकानों में रह रहे हैं। सुबह होते ही पुरुष काम पर और महिलाएं घरेलू कार्यों के लिए बाहर निकल जाती हैं। बच्चे स्कूल चले जाते हैं, जबकि छोटे बच्चे और बुजुर्ग दिन के समय कॉलोनी में अधिक नजर आते हैं।
यही वह समय है जब गलियों में घूमते कुत्तों के झुंड सबसे अधिक चिंता का कारण बनते हैं। रहवासियों को आशंका है कि यदि कोई बच्चा कुत्तों से डरकर भागा या किसी बुजुर्ग के पीछे अचानक कुत्ते दौड़े तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
कुत्तों के पीछे दौड़ने से दोपहिया चालक भी परेशान…
रहवासियों के अनुसार कई बार कुत्ते दोपहिया वाहनों के पीछे दौड़ पड़ते हैं। अचानक सामने गाय, सांड या कुत्ता आ जाने पर चालक संतुलन खो सकता है। बुजुर्गों के लिए यह जोखिम और बढ़ जाता है।
रहवासियों का सवाल है – यदि कुत्तों के झुंड से बचने के प्रयास में कोई बच्चा सड़क पर गिर जाए या कोई दोपहिया चालक दुर्घटनाग्रस्त हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा…?
घरौंदा के जागरूक रहवासियों ने खुद उठाई सफाई की जिम्मेदारी…
कॉलोनी की बदहाल स्थिति के बीच कुछ मूल रहवासियों ने अपने स्तर पर स्वच्छता के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया है। लोगों को खुले में कचरा नहीं डालने और आसपास सफाई रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
हालांकि रहवासियों का कहना है कि केवल कुछ लोगों के प्रयास से पूरी कॉलोनी की तस्वीर नहीं बदली जा सकती। इसके लिए नियमित कचरा संग्रहण, सफाई व्यवस्था और नागरिकों की जिम्मेदारी- तीनों का एक साथ होना जरूरी है।
घरौंदा के मूल रहवासी कम हुए, किरायेदारों की संख्या बढ़ी…
रहवासियों के अनुसार समय के साथ कॉलोनी में मूल आवंटियों की संख्या कम हुई है और बड़ी संख्या में मकान किराये पर दिए गए हैं। कुछ मूल रहवासी दूसरे क्षेत्रों की अपेक्षाकृत सुरक्षित कॉलोनियों में चले गए हैं, जबकि कुछ संपन्न परिवारों ने निवेश के उद्देश्य से फ्लैट खरीदे हैं।
रहवासियों का कहना है कि कॉलोनी की मौजूदा समस्याओं और मूलभूत सुविधाओं की कमी का असर संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर भी पड़ा है। उनका कहना है कि कई लोग अपनी संपत्ति बेचने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अपेक्षित खरीदार नहीं मिल रहे।
घरौंदा में 48 दुकानों का मार्केट, केवल 8 दुकानें संचालित …
प्यारेलाल खण्डेलवाल आवासीय परिसर में रहवासियों की सुविधा के लिए ब्लॉक बी-1, बी-2, बी-3 और ए-1 के ग्राउंड फ्लोर पर व्यावसायिक दुकानें विकसित की गई थीं। रहवासियों के अनुसार कुल 48 दुकानों में से वर्तमान में करीब 8 दुकानें ही संचालित हैं, जबकि शेष दुकानों पर लंबे समय से ताले लगे हुए हैं।
रहवासियों का कहना है कि परिसर की समस्याओं और कमजोर व्यावसायिक गतिविधियों के कारण कई दुकान मालिक अपनी खरीदी गई दुकानों को बेचने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ दुकानदारों को मूल क्रय राशि के आसपास भी ग्राहक नहीं मिल पा रहे हैं।
घरौंदा में कथित अवैधानिक गतिविधियों की शिकायतों ने भी बढ़ाई चिंता …
रहवासियों के अनुसार कॉलोनी की मूलभूत समस्याओं के साथ कुछ कथित अवैधानिक गतिविधियों को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि संबंधित विभागों को समय-समय पर निरीक्षण कर ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगानी चाहिए, ताकि आवासीय परिसर की सुरक्षा और शांतिपूर्ण वातावरण कायम रह सके।
जलकर जमा ना होने पर नल कनेक्शन काटे जाने की खबर …
जलकर और अन्य करों के भुगतान को लेकर भी रहवासियों में अलग-अलग समस्याएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों के अनुसार बकाया जलकर अथवा अन्य देनदारियों के चलते नल कनेक्शन काटे जाने की कार्रवाई नगर निगम द्वारा की गई है। रहवासियों का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जानकारी और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है।
नगर निगम, पुलिस और बीडीए मिलकर करें कार्रवाई..
रहवासियों का कहना है कि घरौंदा की समस्याएं केवल एक विभाग से संबंधित नहीं हैं। कचरा और सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम से जुड़ी है, जबकि आवासीय परिसर की व्यवस्थाओं में बीडीए की भूमिका है। सुरक्षा और कथित अवैधानिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
इसलिए बीडीए, नगर निगम और पुलिस को संयुक्त निरीक्षण कर कॉलोनी की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना चाहिए। रहवासियों का कहना है कि कार्रवाई किसी दुर्घटना के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होनी चाहिए।
रहवासियों की प्रमुख मांगें
आवारा कुत्तों का तत्काल सर्वे कर नियमानुसार नियंत्रण किया जाए।
– बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए झुंड में घूम रहे कुत्तों पर कार्रवाई हो।
– कचरा संग्रहण वाहन का निश्चित समय निर्धारित किया जाए।
– खुले में कचरा फेंकने पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
– कॉलोनी में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित हो।
– आवारा गाय, सांड और अन्य पशुओं को नियंत्रित किया जाए।
– बीडीए, नगर निगम और पुलिस संयुक्त रूप से कॉलोनी का निरीक्षण करें।
– कथित अवैधानिक गतिविधियों की शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।





