श्री आनंदपुर धाम में गुरु पूर्णिमा महापर्व का दिव्य समापन, गुरु भक्ति में सराबोर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के सरोवर में लगाई आस्था की डुबकी
तिलकोत्सव, दिव्य सत्संग और गुरु दर्शन के लिए उमड़े हजारों श्रद्धालु, अनुशासन, सेवा और समर्पण बना आयोजन की सबसे बड़ी पहचान : गुरु पूर्णिमा महापर्व के समापन के बाद श्री आनंदपुर धाम परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच पूर्णिमा का मनोहारी चंद्रमा पूरे वातावरण को आध्यात्मिक आभा से आलोकित करता हुआ।

आनंदपुर धाम से सुरेन्द्र मिश्रा …

भोपाल/जनकल्याण मेल।आषाढ़ पूर्णिमा पर श्री आनंदपुर धाम में आयोजित गुरु पूर्णिमा महापर्व का बुधवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य समापन हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य श्री हुजूर गुरु महाराज जी के श्रीचरणों में श्रद्धापूर्वक नतमस्तक होकर गुरु कृपा का आशीर्वाद प्राप्त किया। तिलकोत्सव, भजन-कीर्तन, दिव्य सत्संग, सेवा और महाप्रसाद के बीच पूरा श्री आनंदपुर धाम आध्यात्मिक चेतना और गुरु महिमा से आलोकित हो उठा।
प्रातःकाल से ही उमड़ पड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब..
सूर्योदय के साथ ही सफेद वेशभूषा धारण किए महिला, पुरुष, युवा और बच्चों की टोलियां अनुशासित ढंग से श्री मंदिर की ओर बढ़ने लगीं। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद कहीं भी अव्यवस्था, धक्का-मुक्की या शोर-शराबा देखने को नहीं मिला। प्रत्येक श्रद्धालु शांत, संयमित और सेवा भाव से अपनी बारी की प्रतीक्षा करता रहा। यह दृश्य गुरु परंपरा के संस्कार, अनुशासन और आध्यात्मिक संस्कृति का जीवंत उदाहरण बन गया।
तिलकोत्सव के साथ गूंज उठा गुरु महिमा का जयघोष …

घने बादलों और सुहावने मौसम के बीच प्रातः 6:15 बजे श्री हुजूर गुरु महाराज जी श्री मंदिर में पधारे। “गुरु पूजा का शुभ दिन आया, करो पूजा श्री सतगुरु महाराज की…” जैसे भक्तिमय भजनों की मधुर स्वर लहरियों के बीच प्रथम प्रवर्तक श्री गुरु महाराज से लेकर पंचम पादशाही श्री गुरु महाराज जी तक परंपरानुसार तिलकोत्सव सम्पन्न हुआ। इसके उपरांत आरती, पूजा, सत्संग एवं भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ तथा श्रद्धालुओं को शुद्ध देसी घी का हलुआ एवं बिस्कुट प्रसाद वितरित किया गया।
दिव्य सत्संग में मिला सेवा, सदाचार और मानवता का संदेश … प्रातः 8 बजे विशाल वातानुकूलित सत्संग हाल के पट खुलते ही सिंहासन पर विराजमान श्री हुजूर गुरु महाराज जी के दर्शन होते ही हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में जयघोष करते हुए दण्डवत प्रणाम किया। श्री हुजूर गुरु महाराज जी ने हुकुमनामा प्रदान करते हुए संगत को आशीर्वाद दिया और अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में गुरु भक्ति, सेवा, सदाचार, प्रेम, मानवता और परोपकार का संदेश दिया। विशाल सभागार, ऊपरी गैलरियां और बाहरी परिसर श्रद्धालुओं से पूरी तरह भर गया, जबकि एलईडी स्क्रीन के माध्यम से दूर बैठे श्रद्धालुओं ने भी सहजता से दर्शन और प्रवचन का लाभ प्राप्त किया।
सेवा, अनुशासन और समर्पण बना आयोजन की सबसे बड़ी पहचान …
गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेवा, अनुशासन और मानवीय मूल्यों का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया। हजारों श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बिना किसी धक्का-मुक्की के गुरु चरणों में नतमस्तक हुए, अपनी श्रद्धानुसार सेवा-भेंट अर्पित की और व्यक्तिगत आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री हुजूर गुरु महाराज जी प्रत्येक श्रद्धालु का आत्मीय भाव से अभिवादन करते हुए स्नेहपूर्वक आशीर्वाद प्रदान करते रहे। श्रद्धालुओं के शांत, संयमित और सेवाभावी व्यवहार ने पूरे आयोजन को अनुकरणीय बना दिया।
प्रकृति भी बनी आध्यात्मिक उत्सव की साक्षी …
आध्यात्मिक उल्लास के इस महापर्व में प्रकृति भी मानो सहभागी बन गई थी। सत्संग स्थल से लगे मोती बाग में मोर, कोयल और अन्य पक्षियों का मधुर कलरव वातावरण को और अधिक पावन बना रहा था। घने बादलों और पूर्णिमा के मनोहारी चंद्रमा के बीच ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सम्पूर्ण प्रकृति भी गुरु महिमा का गुणगान कर रही हो।
महाप्रसाद ग्रहण कर लौटे श्रद्धालु …
महाप्रसाद एवं लंगर में खीर, रोटी, चावल और मटर-पनीर की सब्जी ग्रहण करने के बाद श्रद्धालु गुरु आशीर्वाद, प्रसाद और अविस्मरणीय आध्यात्मिक स्मृतियों को अपने साथ लेकर अपने-अपने गृह नगरों के लिए रवाना हुए। महापर्व की दिव्य अनुभूतियां प्रत्येक श्रद्धालु के चेहरे पर सहज ही झलक रही थीं।
गुरु पूर्णिमा महापर्व ने दिया आत्मिक जागरण का संदेश …
श्री आनंदपुर धाम में आयोजित गुरु पूर्णिमा महापर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि गुरु केवल आध्यात्मिक पथप्रदर्शक ही नहीं, बल्कि मानव जीवन में अनुशासन, सेवा, सद्भाव, प्रेम और आत्मिक जागरण के सर्वोच्च प्रेरणास्रोत हैं। हजारों श्रद्धालुओं की अनुशासित सहभागिता, सेवा भावना और गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा ने इस दिव्य आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया। गुरु कृपा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत यह महापर्व लंबे समय तक श्रद्धालुओं के मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ गया।





