आनंदपुर धाम में गुरु पूर्णिमा के पूर्व आनंद सरोवर में हुआ दिव्य स्नान

श्री आनंदपुर धाम से सुरेन्द्र मिश्रा
भोपाल/जनकल्याण मेल / गुरु पूर्णिमा महापर्व की पूर्व संध्या पर आनंदपुर धाम का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो उठा। प्रातःकाल की पहली किरण फूटने से पहले ही सुबह चार बजे से देशभर से आए लाखों श्रद्धालु आनंद सरोवर की ओर उमड़ पड़े। चारों ओर सफेद वस्त्रधारी भक्तों एवं भगवा परिधानधारी संतों की उपस्थिति ने ऐसा अलौकिक दृश्य उपस्थित किया, मानो स्वयं देवभूमि धरती पर उतर आई हो।
बादलों से आच्छादित आकाश के बीच जैसे ही सूर्यदेव की किरणें फूटीं, ऐसा प्रतीत हुआ मानो प्रकृति स्वयं श्री गुरु महाराज जी के दर्शन करने को आतुर हो। शंखध्वनि और जयघोष के मध्य श्री गुरु महाराज जी का पावन आगमन हुआ। “बोलो जयकारा, मेरे श्री गुरु महाराज जी की जय” तथा “जय हो दीनदयाल” के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा और श्रद्धालु आनंद-विभोर हो गए।
श्री गुरु महाराज जी ने आगमन के साथ ही लाखों श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार करते हुए सभी को आशीर्वाद प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने आनंद सरोवर में पुष्प अर्पित कर उठती लहरों को शांत किया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो सरोवर की लहरें भी अपने आराध्य के चरणों में नतमस्तक होकर शांत हो गई हों।
इसके पश्चात श्री गुरु महाराज जी ने सभी श्रद्धालुओं को पाँच मिनट तक मौन ध्यान में बैठने की आज्ञा दी। देखते ही देखते हजारों-लाखों श्रद्धालु एक साथ शांतचित्त होकर परमपिता परमात्मा के ध्यान में लीन हो गए। वह दृश्य आध्यात्मिक एकाग्रता और आत्मिक शांति का अनुपम उदाहरण बन गया।
इसके बाद विशेष रूप से निर्मित काँच के मंडप में श्री गुरु महाराज जी के पावन स्नान के दर्शन हुए। इस दिव्य अनुष्ठान को देखने के लिए श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। भजनों की मधुर स्वर-लहरियां वातावरण को भक्तिमय बनाए हुए थीं और श्रद्धालु इस अलौकिक क्षण को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते दिखाई दिए।

आनंद सरोवर का स्वच्छ, निर्मल एवं पवित्र जल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहा। श्री गुरु महाराज जी के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के पश्चात श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव से सरोवर में स्नान कर अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से पवित्र बनाने का संकल्प लिया। इसके बाद श्री मंदिर में तिलक, आरती, पूजा, सत्संग और भजन-कीर्तन का क्रम देर तक चलता रहा।
गुरु पूर्णिमा महापर्व से एक दिन पूर्व श्री मंदिर सहित तृतीय, चतुर्थ एवं पंचम पादशाही श्री गुरु महाराज जी की समाधियों को रंग-बिरंगे पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया था। पूरा धाम फूलों, ध्वजों और आकर्षक सजावट से सुसज्जित होकर आध्यात्मिक सौंदर्य की अनुपम छटा बिखेर रहा था।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में आयोजित इसी गुरु पूर्णिमा महापर्व में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी आनंदपुर धाम पहुंचकर श्री गुरु महाराज जी का आशीर्वाद प्राप्त कर चुके हैं, जिससे इस आध्यात्मिक आयोजन की राष्ट्रीय महत्ता और अधिक बढ़ गई।
इस अवसर पर भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक जनकल्याण मेल के संपादक सुरेन्द्र मिश्रा ने भी अपने परिवार सहित आनंद सरोवर में श्रद्धापूर्वक स्नान किया तथा श्री गुरु महाराज जी के श्रीचरणों में मत्था टेककर अपने परिवार एवं समस्त समाज के लिए भक्ति, सेवा, सद्बुद्धि और लोककल्याण का आशीर्वाद मांगा। श्री मंदिर में तिलक लगाकर आरती एवं पूजा-अर्चना कर उन्होंने आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।
इस अवसर पर भक्तों के कंठ से एक ही स्वर बार-बार गूंजता रहा –
“जय हो दीनदयाल, आपकी कृपा का है कमाल।
लाखों भक्त कर रहे जय-जयकार।”
और श्रद्धालुओं की भावनाओं को स्वर देती ये पंक्तियां पूरे वातावरण में गूंजती रहीं …
जहां गुरु चरणों की धूल मिले, वहीं तीर्थों का सार।
आनंदपुर धाम में मिलता है भक्ति, शांति और जीवन का उद्धार ।।
गुरु चरणों में जो शीश झुकाए, उसका जीवन धन्य हो जाए।
गुरु कृपा की अमृत वर्षा से मन, वचन और कर्म पावन हो जाए ।।
गुरु पूर्णिमा का यह महापर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, गुरु भक्ति, सेवा, ध्यान और मानवता के कल्याण का विराट संदेश बनकर प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय पर अमिट छाप छोड़ गया।





