उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने साहित्यिक परंपरा के संरक्षण पर दिया जोर, कवयित्रियों की ओजस्वी प्रस्तुतियों ने किया मंत्रमुग्ध
गूंजा शब्दों का अनहद नाद, भव्य कवयित्री सम्मेलन में बही साहित्य की सरिता

भोपाल /जनकल्याण मेल / साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को समर्पित संस्था ‘अनहद नाद प्रशांत’ के तत्वावधान में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय रीवा के सभागार में भव्य कवयित्री सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। गरिमामयी सारस्वत आयोजन में मध्यप्रदेश शासन के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ऑनलाइन माध्यम से मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने उद्बोधन में संस्था के साहित्य संवर्धन के प्रयासों की सराहना करते हुए रीवा की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश साहित्य परिषद के कोषाध्यक्ष कमलाकांत गर्ग तथा वरिष्ठ कवि डॉ. चंद्रिका प्रसाद ‘चंद्र’ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मंच पर डॉ. सी.पी. तिवारी (सेवानिवृत्त प्राचार्य), आर.डी. मिश्रा (सेवानिवृत्त वायु सेना अधिकारी एवं सहायक प्रबंधक, एसबीआई), वरिष्ठ कवि रामनरेश तिवारी ‘निष्ठुर’, संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा तथा वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ल भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्नेहा त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत वाणी वंदना से हुआ। इसके बाद सीमा रानी झा ने संस्था का परिचय दिया, जबकि प्रथम सत्र का प्रभावी संचालन डॉ. रंजना बंसल ने किया। इस अवसर पर संस्था की ओर से विश्वविद्यालय के विधि विभाग के पुस्तकालय हेतु विधि विषयक पुस्तकों का भेंट स्वरूप प्रदान किया गया।
काव्य पाठ के दौरान अंचल की प्रख्यात कवयित्रियों ने विविध भावों से ओतप्रोत रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. रंजना बंसल ने अपनी बेबाक अभिव्यक्ति से प्रभाव छोड़ा। प्रवीणा पांडे ने मानवता और राष्ट्रीय चेतना का संदेश दिया। सीमा रानी झा ने नारी शक्ति के आत्मविश्वास और सामर्थ्य को स्वर दिया। विमलेश मिश्रा ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कविता प्रस्तुत कर वीरता का आह्वान किया। ऋचा पांडे ने भावनात्मक अभिव्यक्ति से श्रोताओं का मन जीता, जबकि अरुणा पाठक ‘आभा’ ने देशभक्ति और राष्ट्रनिष्ठा पर आधारित सशक्त रचना सुनाई। सौम्या चौरसिया ने शिव-शक्ति की आराधना से आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया और गीता शुक्ला ‘गीत’ ने प्रेम की सहज अनुभूतियों को अपनी कविता में अभिव्यक्त किया। अंत में संस्था की अध्यक्ष एवं आयोजन की संयोजिका डॉ. आरती तिवारी ने अपनी ओजस्वी एवं आध्यात्मिक रचना से काव्य संध्या को ऊंचाई प्रदान की।
सम्मेलन में शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, साहित्यकार, शिक्षाविद, प्रशासनिक अधिकारी एवं पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से नगर निगम रीवा के डिप्टी कमिश्नर प्रकाश द्विवेदी, जगजीवन लाल तिवारी ‘कक्का’, डॉ. राजकुमार शर्मा ‘राज’, चंद्रकांत तिवारी, शिवानंद तिवारी, चेतना मिश्रा, अधिवक्ता संतोष अवधिया, डॉ. आलोक मिश्रा, डॉ. सप्तमुनि द्विवेदी, अनिमेष द्विवेदी, अभिनव त्रिपाठी, डॉ. राजेश शुक्ला, डॉ. देवेंद्र पांडेय, डॉ. प्रकाश शर्मा, डॉ. श्रद्धा सिंह, डॉ. भारतेन्दु मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार मधुसूदन पांडे, डॉ. वंदना त्रिपाठी, प्रवेश तिवारी तथा विप्र सेवा संघ के अध्यक्ष राजीव शुक्ला सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन पर संस्था की अध्यक्ष डॉ. आरती तिवारी ने सभी अतिथियों, कवयित्रियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। यह आयोजन रीवा की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला यादगार आयोजन सिद्ध हुआ।





