वट सावित्री व्रतारंभ, प्रदोष व्रत एवं शनिवार के पावन अवसर पर सूक्ष्म रूप हनुमान मंदिर में दिव्य आराधना …

भोपाल/जनकल्याण मेल/
वट सावित्री व्रतारंभ, प्रदोष व्रत तथा शनिवार के इस अत्यंत पुण्यदायी अवसर पर घरौंदा सलैया, भोपाल स्थित प्यारेलाल खण्डेलवाल आवासीय परिसर के सूक्ष्म रूप हनुमान मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ भगवान श्री हनुमान जी का विशेष श्रृंगार एवं पूजन सम्पन्न हुआ।
घरौंदा के धर्म प्रेमी परिवार श्री प्रदीप पाल एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुमन पाल ने परम श्रद्धा के साथ प्रभु को नवीन दिव्य वस्त्र अर्पित किए। मंदिर के पुजारी पं. राजू शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराकर पुष्पमालाओं से अलंकृत किया। इसके पश्चात तिलक, पूजन, हनुमान चालीसा के बाद हनुमान जी की आरती हुई तथा सभी श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।

इस अवसर पर एक अत्यंत अद्भुत एवं भावविभोर कर देने वाला दृश्य उपस्थित भक्तों ने अपनी आँखों से देखा। जैसे ही भगवान का दिव्य श्रृंगार प्रारम्भ हुआ, उसी समय शंकर गाय प्रजाति का पूरा परिवार स्वतः मंदिर परिसर में आकर शांत भाव से खड़ा हो गया। एक ओर प्रभु का अलौकिक श्रृंगार हो रहा था, दूसरी ओर भजन-कीर्तन की मधुर स्वर लहरियाँ गूँज रही थीं और गौवंश मानो प्रभु के दर्शन एवं भक्ति-रस का आनंद ले रहा था। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे भगवान की करुणामयी एवं दिव्य लीला के रूप में अनुभव किया।
इस पावन अवसर पर पं. सुरेन्द्र मिश्रा, शशिकांत काले सहित अनेक श्रद्धालुओं ने दर्शन कर प्रभु से समस्त मानव समाज के सुख, शांति, समृद्धि एवं सद्बुद्धि की मंगलकामना की।
आज शनिवार एवं प्रदोष के शुभ संयोग में बड़े महादेव पूजन का भी विशेष महत्व है। सायं 7:30 बजे सूक्ष्म रूप हनुमान मंदिर में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, हनुमान अष्टक, आरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा।

सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से सादर आग्रह है कि वे अपने परिवार सहित इस दिव्य आराधना में सहभागी बनें। श्रीराम भक्त पवनपुत्र हनुमान जी की भक्ति मनुष्य के जीवन में साहस, सेवा, विनम्रता, आत्मबल एवं धर्मनिष्ठा का संचार करती है। आइए, इस पुण्य अवसर पर प्रभु के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित कर जीवन को आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित करें।
“जहाँ भक्ति होती है, वहाँ ईश्वर स्वयं अपनी उपस्थिति का आभास करा देते हैं।”
॥ जय श्रीराम ॥
॥ जय पवनपुत्र हनुमान ॥





