हंता वायरस को लेकर WHO अलर्ट, संक्रमितों के लिए आइसोलेशन अनिवार्य

नई दिल्ली
हंता वायरस को लेकर एक नई खबर आई है। अब तक हम यही जानते थे कि यह वायरस चूहों की गंदगी से फैलता है, लेकिन WHO के चीफ डॉ. टेड्रोस ने बताया है कि इसका एंडिस वायरस वाला रूप अब इंसानों के जरिए भी एक-दूसरे में फैल सकता है। MV Hondius जहाज पर इसके 8 मरीज मिले हैं, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है। हालात को देखते हुए WHO ने सख्त नियम बना दिए हैं ताकि इसे दुनिया में फैलने से रोका जा सके। राहत की बात बस इतनी है कि यह कोविड की तरह हवा की रफ्तार से नहीं फैलेगा, लेकिन फिर भी बहुत सावधान रहने की जरूरत है।

इंसान से इंसान में फैलने वाला वायरस
WHO के मुताबिक, एंडिस वायरस दुनिया का ऐसा हंता वायरस है जो एक बीमार इंसान से दूसरे स्वस्थ इंसान के शरीर में जा सकता है। अगर कोई इस वायरस से बीमार व्यक्ति के बहुत करीब रहता है या उसके संपर्क में आता है, तो उसे भी यह बीमारी हो सकती है। इस वायरस का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि शरीर में जाने के बाद इसके लक्षण दिखने में 6 हफ्ते (42 दिन) तक लग सकते हैं। यानी मरीज को खुद पता नहीं चलेगा कि वह बीमार है और वह अनजाने में दूसरों को भी संक्रमित कर सकता है।

42 दिनों तक डॉक्टर्स करेंगे मॉनिटरिंग
WHO का कहना है कि जो लोग मरीजों के साथ रहे हैं, उन्हें कम से कम 42 दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रहना होगा। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि इस वायरस को पनपने में लंबा समय लगता है। हालांकि, अभी आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, बस सावधानी रखकर इसकी चेन तोड़ी जा सकती है।

हंता वायरस की शुरुआत कहां से हुई?
National Library of Medicine के अनुसार, हंता वायरस कोई बिल्कुल नई बीमारी नहीं है, लेकिन इसका इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। इस वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की हंतन नदी (Hantan River) के नाम पर रखा गया है। साल 1976 में पहली बार डॉक्टर हो वांग ली ने एक बीमार चूहे के शरीर में इस वायरस की पहचान की थी।

1950 के दशक में कोरियाई युद्ध के दौरान करीब 3,000 अमेरिकी और कोरियाई सैनिक एक रहस्यमयी बीमारी की चपेट में आ गए थे। उस समय इसे कोरियाई रक्तस्रावी बुखार कहा गया था, जो बाद में हंता वायरस के रूप में पहचाना गया। साल 1993 में अमेरिका के फोर कॉर्नर्स इलाके में भी इस वायरस ने कोहराम मचाया था, जहां अचानक कई स्वस्थ लोगों की मौत फेफड़ों में पानी भरने (Hantavirus Pulmonary Syndrome) की वजह से हो गई थी।

WHO के नए नियम
    जिस भी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण दिखें, उसे तुरंत बाकी लोगों से दूर एक अलग कमरे में शिफ्ट कर दिया जाए।
    जहाज पर मौजूद लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने कमरों (कैबिन) में ही रहें।
    कमरे से बाहर निकलने पर मास्क पहनना जरूरी है।
    मरीजों की देखभाल करने वालों को पीपीई किट पहनने को कहा गया है।
    कमरों और सामान को बार-बार साफ करें।

डिस्क्लेमरःइस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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