सोशल मीडिया के दुरुपयोग से महिला को बदनाम करने के आरोप में अयूब मंसूरी पर कई धाराओं में एफआईआर दर्ज …

गजेंद्र सोनी…
सारनी [जनकल्याण मेल]
सोशल मीडिया के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने और उसे बदनाम करने के आरोप में शेख अयूब उर्फ अयूब मंसूरी के खिलाफ पुलिस ने कई गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया है। यह कार्रवाई सारिका मिस्त्री की शिकायत पर गुरुवार को सारनी पुलिस द्वारा की गई।
शिकायत के अनुसार आरोपी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर महिला के खिलाफ आपत्तिजनक, अपमानजनक और झूठे आरोप प्रसारित किए गए, जिससे पीड़िता को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी और सामाजिक स्तर पर उसकी छवि को नुकसान पहुँचा।
सोशल मीडिया एक्टिविज्म की आड़ में आरोप ~
पुलिस को दी गई शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि आरोपी स्वयं को सोशल मीडिया एक्टिविस्ट बताता है, लेकिन उसके कृत्य समाजहित के बजाय व्यक्तिगत बदले और दबाव बनाने की मंशा से जुड़े पाए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उसने आरोपी की गतिविधियों का विरोध किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, तो आरोपी द्वारा कथित रूप से उसे डराने-धमकाने और बदनाम करने का प्रयास किया गया।
झूठी शिकायत के जरिए बदनामी का प्रयास ~
मामले में यह भी आरोप है कि आरोपी ने एक युवती के माध्यम से झूठी शिकायत और निराधार आरोप लगवाकर सोशल मीडिया पर महिला की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। इससे पीड़िता और उसके परिवार को मानसिक तनाव और सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ा।
एसडीओपी कार्यालय में हुई पूछताछ ~
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओपी प्रियंका करचाम द्वारा संबंधित पक्षों को कार्यालय बुलाकर पूछताछ की गई। क्रॉस-क्वेश्चनिंग के दौरान महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की गई।
पुलिस की सख्त कार्रवाई ~
सारनी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर महिला की गरिमा, सम्मान और निजता से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून का दुरुपयोग कर या झूठे आरोप लगाकर किसी को बदनाम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला :~
पुलिस ने जांच के आधार पर आरोपी शेख अयूब मंसूरी के खिलाफ निम्न धाराओं में अपराध दर्ज किया है~
भारतीय न्याय संहिता (BNS)
धारा 296(ए) — सार्वजनिक अश्लीलता
धारा 351(2) — आपराधिक धमकी
अनुसूचित जाति / जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम
धारा 3(1)(द) — सार्वजनिक अपमान
धारा 3(1)(ध) — जातिसूचक शब्दों का प्रयोग
धारा 3(2)(va) — जानबूझकर अपराध करना
पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



