नाड़ी तरंगनी मशीन : प्राचीन आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत संगम
भोपाल वन मेले में एल.एन.आयुर्वेद चिकित्सालय के स्टॉल पर लोगों ने जाना स्वास्थ्य परीक्षण का नया तरीका

सुरेन्द्र मिश्रा चन्देरी वाले
भोपाल [जनकल्याण मेल]
मानव शरीर की सेहत का सबसे सटीक संकेत उसकी नाड़ी में छिपा होता है। आयुर्वेद में हजारों वर्षों से नाड़ी परीक्षण के माध्यम से शरीर के भीतर चल रही गतिविधियों और रोगों की पहचान की जाती रही है। इसी प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए विकसित की गई है नाड़ी तरंगनी मशीन, जो आज वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों में एक प्रभावशाली और उपयोगी उपकरण के रूप में उभर रही है।
क्या है नाड़ी तरंगनी मशीन…?
नाड़ी तरंगनी मशीन एक आधुनिक जैव-ऊर्जा विश्लेषण उपकरण है, जो व्यक्ति की कलाई पर स्थित नाड़ी बिंदु पर लगाए गए विशेष सेंसर के माध्यम से नाड़ी स्पंदन, कंपन और तरंगों को रिकॉर्ड करती है। यह मशीन इन संकेतों का डिजिटल विश्लेषण कर शरीर की आंतरिक स्थिति, ऊर्जा संतुलन और स्वास्थ्य संकेतों का आकलन करती है।
मशीन की संरचना : एक नजर में
नाड़ी तरंगनी मशीन मुख्य रूप से निम्न भागों से बनी होती है :~
संवेदनशील सेंसर : कलाई की नाड़ी पर लगाए जाते हैं, जो नाड़ी की गति, दबाव, लय और तरंगों को पकड़ते हैं।
डिजिटल प्रोसेसिंग यूनिट :~ सेंसर से प्राप्त संकेतों को कंप्यूटर प्रणाली तक पहुंचाकर उनका सूक्ष्म विश्लेषण करती है।
डिस्प्ले स्क्रीन एवं सॉफ्टवेयर इंटरफेस : स्क्रीन पर रंगीन ग्राफ, तरंगें और रिपोर्ट दिखाई देती हैं, जिनमें त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) का संतुलन या असंतुलन दर्शाया जाता है।
डेटा स्टोरेज सिस्टम :~ रोगी की पूर्व एवं वर्तमान रिपोर्ट सुरक्षित रखी जाती है, जिससे भविष्य में तुलना और उपचार की प्रगति का आकलन किया जा सके।
नाड़ी तरंगनी कैसे करती है काम …?
यह मशीन नाड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवाहित ऊर्जा आवृत्तियों को पढ़ती है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर के प्रत्येक अंग, ग्रंथि और कोशिका की अपनी विशिष्ट तरंग होती है। जब किसी अंग में विकार उत्पन्न होता है, तो उसकी तरंगों में असंतुलन आ जाता है। नाड़ी तरंगनी मशीन इन्हीं असंतुलनों को पहचानकर ~प्रारंभिक रोग संकेत, मानसिक तनाव की स्थिति,अंगों की कार्यक्षमता,ऊर्जा अवरोध का आकलन करती है।
किन समस्याओं की पहचान में सहायक …?
नाड़ी तरंगनी मशीन से प्रारंभिक स्तर पर निम्न स्वास्थ्य स्थितियों की जानकारी मिल सकती है— हृदय, यकृत, गुर्दा एवं फेफड़ों की कमजोरी मधुमेह, थायराइड, उच्च रक्तचाप,मानसिक तनाव, अनिद्रा, अवसाद,पाचन तंत्र की गड़बड़ी
रोग प्रतिरोधक क्षमता की स्थिति नाड़ी तरंगनी मशीन की प्रमुख विशेषताएं :~
*बिना सुई और बिना दर्द जांच
*किसी प्रकार का साइड इफेक्ट नहीं
*कम समय में विस्तृत रिपोर्ट
*आयुर्वेदिक उपचार के लिए मार्गदर्शन
*रोग की जड़ तक पहुंचने में सहायक
योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा में उपयोगीविशेषज्ञों के अनुसार नाड़ी तरंगनी मशीन का उपयोग योग, ध्यान, विपश्यना, प्राणायाम एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों में उपचार की दिशा तय करने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहा है। इससे उपचारकर्ता को व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति का समग्र चित्र प्राप्त होता है।
भोपाल मे चल रहे वन मेले में लोगों ने दिखाई गहरी रुचि :~वन मेले में एल.एन. आयुर्वेद चिकित्सालय, भोपाल द्वारा लगाए गए स्टॉल पर नाड़ी तरंगनी मशीन आकर्षण का केंद्र बनी है। बड़ी संख्या में नागरिकों ने मशीन के माध्यम से अपनी नाड़ी जांच कराई और आयुर्वेदिक स्वास्थ्य जानकारी प्राप्त की।
संस्थान की तीन वर्षों की सेवा यात्रा :~ एल.एन.आयुर्वेद चिकित्सालय भोपाल के डॉ. रविकांत गुप्ता ने जनकल्याण मेल के प्रधान संपादक सुरेन्द्र मिश्र एवं संध्या मिश्रा की नाड़ी तरंगनी से जांच करते हुए बताया कि एल.एन.सी.टी. के संचालक डॉ. अनुपम चौकसे के मार्गदर्शन में, प्राचार्य डॉ. सपन जैन एवं डायरेक्टर डॉ. विशाल शिवहरे के सहयोग से संस्थान लगभग तीन वर्षों से नाड़ी तरंगनी मशीन से उपचारित रोगियों का परीक्षण कर आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है।
निष्कर्ष :~ नाड़ी तरंगनी मशीन आधुनिक युग में आयुर्वेदिक नाड़ी विज्ञान का डिजिटल रूप है। यह न केवल स्वास्थ्य संकेतों की पहचान में सहायक है, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान करती है। आने वाले समय में यह तकनीक आम नागरिकों के लिए स्वास्थ्य जागरूकता का एक सशक्त माध्यम बन सकती है।





