चंदेरी अस्पताल के उन्नयन के लिए डेढ़ हेक्टेयर से ज्यादा भूमि उपलब्ध…
फिर भी अस्पताल निर्माण कार्य में राजनैतिक व प्रशासनिक लोग डाल रहे अडंगा ...

निर्मल विश्वकर्मा
चंदेरी [जनकल्याण मेल] जब चंदेरी सिविल अस्पताल के पास लगभग डेढ़ हेक्टेयर से ज्यादा भूमि वर्तमान अस्पताल परिसर में ही उपलब्ध है।
चंदेरी के 30 से 50 बिस्तर उन्नयन होने वाले अस्पताल का निर्माण न हो पाना, जिले के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की हठधर्मिता का ही कारण है, क्योंकि इसके लिए पूर्व में 2 जगह कलेक्टर अशोकनगर द्वारा भूमि का आवंटन किया जा चुका है और अब तीसरी जगह भूमि सर्वे क्रमांक 669/ 3 में आवंटन की तैयारी की जा रही है। यहां यह बताना उचित होगा कि मुंगावली और चंदेरी की अस्पताल के उन्नयन के लिए एक साथ जारी की गई राशि से मुंगावली की अस्पताल का निर्माण वर्तमान परिसर में होकर आज पूरी तरह संचालित है,अशोकनगर में भी वर्तमान अस्पताल परिसर मैं ही अस्पताल के उन्नयन का कार्य पूर्ण हो चुका है, किंतु उसकी दूसरी ओर चंदेरी के सिविल अस्पताल के साथ आज तक खिलवाड़ जारी है और अस्पताल का निर्माण कार्य प्रारंभ ना होकर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर सवाल उठ रहे है। वर्तमान में जहां सिविलअस्पताल संचालित है, उसके पास लगभग 3564 वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध है। यदि अस्पताल के डेनिडा कैंपस को मिला लिया जाए तो उसके पास लगभग 6786 वर्ग मीटर जगह उपलब्ध है इस प्रकार कुल 10350 वर्ग मीटर जगह अस्पताल परिसर में उपलब्ध है जो कि अस्पताल को बनाने के लिए पर्याप्त है। फिर भी स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पिछले 3 वर्षों से खिलवाड़ की जा रही है। भारत सरकार के द्वारा जारी अस्पतालों के निर्माण की गाइडलाइन के अनुसार 65 से 85 वर्ग मीटर प्रति बेड भूमि की आवश्यकता होती है, इसमें इसका बीच का अनुमान लिया जावे और 75 वर्ग मीटर से भूमि की आवश्यकता को मापा जाए तो 50 बिस्तर अस्पताल के निर्माण के लिए 3750 वर्ग मीटर यानी 4000 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता होगी जो वर्तमान अस्पताल परिसर में उपलब्ध भूमि के मान से बहुत कम है, क्योंकि वर्तमान अस्पताल परिसर में 10350 वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध है और चाहिए सिर्फ 4000 वर्ग मीटर है अस्पताल परिसर से लगे हुए अन्य विभाग जिनमें जनपद व कृषि विभाग है उनकी कुल भूमि वह 4680 वर्ग मीटर है यदि इन सबको ही आपस में जोड़ दिया जाए तो कल 15030 वर्ग मीटर भूमि अस्पताल परिसर के पास उपलब्ध है जो कोई डेढ़ हेक्टेयर से कहीं ज्यादा अधिक होती है। इस प्रकार 30 से 50 बिस्तर के उन्नयन अस्पताल का निर्माण वर्तमान अस्पताल परिसर में भारत सरकार की गाइडलाइन एवं उपलब्ध भूमि के आधार पर किया जा सकता है। परंतु पिछले 3 साल से जिले के कलेक्टर एवं जनप्रतिनिधि सिर्फ जमीनों को ढूंढ रहे हैं परंतु जहां अस्पताल है उसमें उपलब्ध भूमि पर निर्माण की अनुमति नहीं दे रहे हैं जो जनता की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ हो रहा है ।
भूमि सर्वे क्रमांक 669/3 की कैफियत …
वर्तमान में जो भूमि के आवंटन की प्रक्रिया चल रही है वह ज्ञात जानकारी में वन भूमि है यह बोर्ड कॉलोनी के पास एवं मेघासन मंदिर के बीच में जगह है, जिसमें वन भूमि के लिए भारत सरकार से अनुमति लेना होगी क्योंकि वन भूमि के लिए भारत सरकार से भूमि के आवंटन की अनुमति लेना आवश्यक होता है, इस भूमि के चारों तरफ जंगल है, यदि अस्पताल इस जगह पर बनेगा तो हर समय वन्य प्राणियों का खतरा भी बना रहेगा, क्योंकि इस भूमि के आगे कोई भी आबादी क्षेत्र नहीं है, पूरा का पूरा जंगल विद्यमान है।
जनमत संग्रह की भी की जा रही उपेक्षा…
अभी हाल ही में चंदेरी एवं आसपास के लगभग 500 लोगों से लिखित रूप से जनमत संग्रह कराया गया था, उसमें वर्तमान अस्पताल परिसर में अस्पताल के निर्माण के लिए 81% लोगों ने अपना लिखित अभिमत दिया था, जिसके बारे में जिले के कलेक्टर सहित क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है, परंतु इसके बावजूद भी जनमत संग्रह को धत्ता बताकर अभी तक अस्पताल के निर्माण के लिए वर्तमान अस्पताल परिसर में निर्णय नहीं किया जा सका, यह आम जनता के साथ किया गया बहुत बड़ा खिलवाड़ है जो किसी भी रूप में उचित नहीं है।
इनका कहना है …
(1) मुझे वर्तमान अस्पताल परिसर में ही उन्नयन किए जाने में कोई आपत्ति नहीं है, किंतु बार-बार भोपाल से आने वाली टीम तथा वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर मजबूरन मुझे भूमि के आवंटन को लेकर पत्र लिखना पड़ रहे हैं। वर्तमान अस्पताल परिसर में ही जब 30 से 50 बिस्तर अस्पताल के उन्नयन के लिए पर्याप्त भूमि है, तो वहीं उन्नयन कार्य होना चाहिए।
[डॉ नीरज छारी]
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला अशोकनगर।
(2) अभी तक अस्पताल के लिए वन भूमि आवंटन का प्रस्ताव मेरे पास नहीं आया है, परंतु इसकी एक निर्धारित प्रक्रिया है जिसे ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना पड़ता है,इसके पश्चात भारत सरकार से अनुमति प्राप्त होने के बाद ही वन भूमि का उपयोग किया जा सकता है। अभी मेरे द्वारा किसी प्रकार का पत्र अस्पताल के निर्माण हेतु अनापत्ति के संबंध में जारी नहीं किया गया है।
[प्रतिभा अहिरवार] जिला वनमंडल अधिकारी, अशोकनगर।
(3) मैंने जून 2024 में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला अशोकनगर को पत्र लिखकर वर्तमान अस्पताल परिसर में ही अस्पताल के उन्नयन कार्य किए प्रार्थना की थी, क्योंकि जिस बिल्डिंग का निर्माण होना है, उसमें डॉक्टर एवं स्टाफ क्वार्टर्स नहीं है, जिस कारण आगामी समय में डॉक्टर एवं स्टाफ को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा तथा विलंब की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होगी। मेरे आगमन से पहले तथा अभी भी अस्पताल के उन्नयन के लिए जगह-जगह भूमि का आवंटन हो रहा है जो उचित नहीं है उचित यही होगा कि 30 से 50 बिस्तर के अस्पताल का उन्नयन कार्य वर्तमान अस्पताल परिसर में ही किया जाए क्योंकि नवीन भवन में राजघाट और पिछोर दोनों तरफ मुख्य द्वार हो जाने से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी।
डॉ प्रशांत दुबे
मुख्य ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर, सिविल अस्पताल,चंदेरी





