सीजफायर का ऐलान होते ही अमेरिका में ट्रंप के इस्तीफे की मांग क्यों उठी?

वाशिंगटन

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ पिछले 40 दिन से जारी सैन्य कार्रवाई रोकने का ऐलान कर दिया है. ट्रंप ने दो हफ्ते के लिए सीजफायर का ऐलान किया है. इजरायल ने भी ईरान के खिलाफ हमले रोकने की बात कही है और आगे की बातचीत पाकिस्तान में होगी. ट्रंप के ऐलान को युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस संदेश से जगी शांति की आस के बाद दुनियाभर के बाजार बम-बम हैं. वहीं, अमेरिका में अब ट्रंप के इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ती नजर आ रही है. अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने ईरान के खिलाफ लड़ाई के इस अंत को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पूर्ण समर्पण बताया है. उन्होंने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन पर कहा है कि इससे ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण मिल गया। 

अमेरिकी सीनेटर ने दावा किया कि वह सच नहीं बता रहे हैं. अगर ईरान की मांग का कुछ हिस्सा भी मान लें, तो डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर उसे नियंत्रण देने की सहमति दे दी है. क्रिस मर्फी ने दुनिया के लिए इसे विनाशकारी स्थिति बताया. वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य ग्वेन मूरे ने युद्ध विराम के बाद राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना की। 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस से ट्रंप पर लगाने की मांग की और कहा कि वह (डोनाल्ड ट्रंप) राष्ट्रपति पद के लिए अयोग्य हैं. ग्वेन मूरे ने तो यहां तक कह दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप को किसी भी संभव तरीके से पद से हटाया जाना चाहिए. ग्वेन मूरे ने कहा कि अब समय आ गया है कि रिपब्लिकन सांसद भी डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर उनकी इस पागलपन भरी नीति को खत्म करें। 

वहीं, अमेरिका के पूर्व एंटी टेरर चीफ जो केंट ने कहा है कि युद्धविराम सफल बनाना है, तो इजरायल को भी संयम बरतने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हमें सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि हम इज़राइल को नियंत्रित रखें. एक तरफ अमेरिका में ट्रंप के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही है, वहीं व्हाइट हाउस ने इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताया है। 

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लीविट ने कहा कि यह अमेरिका की जीत है. इसे राष्ट्रपति ट्रंप और हमारी शानदार सेना ने संभव बनाया है. उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत से ही राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अभियान के चार से छह हफ्ते तक चलने के अनुमान लगाए थे. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने यह भी कहा कि अमेरिकी सैनिकों की असाधारण क्षमता से सैन्य लक्ष्य 38 दिन में ही हासिल कर लिया, उसे पार भी कर लिया। 

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