मध्यप्रदेश सरकार ने रखा दो वर्ष का लेखा-जोखा, बताया तीन वर्ष का रोडमैप …

कुशाभाऊ ठाकरे सभागार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उमड़े पत्रकार, वायरल वीडियो ने अनुशासन और पहचान प्रणाली पर खड़े किए सवाल

सुरेन्द्र मिश्रा, चन्देरी वाले

भोपाल [जनकल्याण मेल] मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस श्रृंखला का आयोजन किया है। इन आयोजनों के माध्यम से सरकार द्वारा अब तक किए गए विकास कार्यों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जा रहा है, साथ ही आगामी तीन वर्षों की विकासात्मक कार्ययोजना (रोडमैप) को भी मीडिया और जनता के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा जा रहा है।

राजधानी भोपाल में आयोजित मुख्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेशभर से आए पत्रकारों की भारी उपस्थिति देखने को मिली। कार्यक्रम स्थल पर मीडिया की सक्रियता और उत्साह इस बात का संकेत था कि सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे विकास मॉडल, नीतिगत निर्णयों और भविष्य की योजनाओं को लेकर पत्रकारों में गहरी रुचि है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान औद्योगिक विकास, निवेश प्रोत्साहन, रोजगार सृजन, स्टार्टअप नीति,एमएसएमई को बढ़ावा,अधोसंरचना विस्तार, सामाजिक कल्याण योजनाएँ तथा प्रशासनिक सुधारों से संबंधित विस्तृत दस्तावेज पत्रकारों को उपलब्ध कराए गए। इन दस्तावेजों में दो वर्षों की उपलब्धियों के साथ-साथ आने वाले तीन वर्षों में राज्य के विकास की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

कार्यक्रम की शुरुआत में स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रेस को संबोधित करते हुए अपने कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ साझा कीं और राज्य को विकास के नए आयाम देने के लिए तैयार किए गए रोडमैप को सामने रखा। इसके पश्चात विभिन्न विभागों के मंत्रीगणों द्वारा अलग-अलग स्थानों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपने-अपने विभागों की प्रगति और भावी योजनाओं की जानकारी दी गई।

सरकार की ओर से पत्रकारों के प्रति सम्मान भाव प्रदर्शित करते हुए रुचिकर भोजन की व्यवस्था की गई तथा एक विशेष बैग के माध्यम से विकास योजनाओं से संबंधित पुस्तकें, जानकारीपरक सामग्री और वर्ष 2026 की डायरी पत्रकारों को प्रदान की गई। यह पहल सरकार और मीडिया के बीच संवाद और सौहार्द को मजबूत करने वाली रही।

वायरल वीडियो ने खड़े किए व्यवस्था से जुड़े सवाल …

इसी क्रम में राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सभागार में आयोजित एक मंत्री स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस के उपरांत सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने प्रेस आयोजनों की व्यवस्थाओं और अनुशासन को लेकर कुछ सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

वीडियो में यह देखा गया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसे कई लोग प्रवेश करते नजर आए, जिनका पत्रकारिता से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कोई संबंध नहीं था, किंतु वे पत्रकारों को मिलने वाले भोजन, हैंड बैग और उसमें रखे शासकीय दस्तावेज़ प्राप्त करने के उद्देश्य से कार्यक्रम स्थल तक पहुँच बना लेते हैं।

कुछ अवसरों पर वरिष्ठ प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पत्रकारों को पीछे करते हुए तथाकथित “मोबाइलाचार्य मीडिया” द्वारा प्रशासनिक व्यवस्थाओं को धता बताकर सामग्री ले जाने के दृश्य भी सामने आए।

यह स्थिति न केवल व्यवस्थागत शिथिलता की ओर संकेत करती है, बल्कि इससे वास्तविक पत्रकारों की छवि को भी आघात पहुँचने की आशंका बनती है। हालांकि यह भी सकारात्मक पक्ष है कि पत्रकार समुदाय का एक बड़ा वर्ग इस विषय में सजग है और ऐसी घटनाओं को सामने लाकर आत्ममंथन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है, जो पत्रकारिता की चेतना का प्रमाण है।

जनहित में अपेक्षित है स्पष्ट नीति ..

भोपाल प्रदेश की राजधानी है, जहाँ प्रतिदिन असंख्य पत्रकारों की उपस्थिति रहती है। ऐसे में यह अपेक्षित है कि जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रेस आयोजनों में केवल मान्यता प्राप्त एवं नीतिगत समाचार पत्रों/माध्यमों के पत्रकारों को ही प्रवेश दिया जाए, तथा अनधिकृत रूप से पहुँचने वाले लोगों को प्रवेश से रोकने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

यह भी देखा गया है कि मुख्यमंत्री की प्रेस वार्ताओं को छोड़कर अन्य मंत्री स्तरीय आयोजनों में दिन-प्रतिदिन भीड़ बढ़ती गई और कई बार दस्तावेज़ों वाले बैग को लेकर अव्यवस्थित स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जो न तो प्रशासनिक गरिमा के अनुकूल है और न ही पत्रकारिता की मर्यादा के। समय रहते यदि स्पष्ट नियम, पहचान प्रणाली और प्रवेश संबंधी प्रावधान लागू किए जाते हैं, तो प्रेस कॉन्फ्रेंस की गरिमा बनी रहेगी, वास्तविक पत्रकारों को सम्मान मिलेगा,और सरकार व मीडिया के बीच विश्वास और संवाद और अधिक सुदृढ़ होगा।

सकारात्मक पहल के साथ सुधार की आवश्यकता के अनुसार समग्र रूप से यह प्रेस कॉन्फ्रेंस श्रृंखला इस बात का प्रमाण है कि मध्य प्रदेश सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और विकासोन्मुखी सोच के साथ आगे बढ़ रही है। साथ ही, यह भी आवश्यक है कि ऐसी सकारात्मक पहलों के साथ व्यवस्थागत सुधारों पर भी समय रहते ध्यान दिया जाए, ताकि लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण स्तंभ पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे।

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