ब्यावरा में शासकीय जमीन पर कब्जा मामला: हाईकोर्ट से राहत, कलेक्टर को 90 दिनों में कार्रवाई का आदेश

सुरेन्द्र मिश्रा
ब्यावरा [जनकल्याण मेल] राजगढ़ जिले के ब्यावरा में शासकीय जमीन पर अवैध कब्जे से परेशान लोगों को आखिरकार हाईकोर्ट से राहत मिली है। शहर के रहवासियों ने भाजपा नेता द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जे और लगातार धमकाने की घटनाओं को लेकर कई बार एसडीएम और कलेक्टर को शिकायतें की थीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूर होकर दो पीड़ितों ने हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में रिट पिटीशन दायर की, जिस पर न्यायालय ने गुरुवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कलेक्टर को 90 दिनों के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
फरियादी नवीन कुमार जाटव और दुर्गाप्रसाद गवली द्वारा दायर रिट पिटीशन नंबर 47575 पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए कलेक्टर राजगढ़ (रेस्पोंडेंट नंबर 3) पिटीशनर्स की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करें और आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने की तिथि से तीन महीने के भीतर कानूनानुसार आवश्यक कार्रवाई करें। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि कलेक्टर द्वारा एक तर्कपूर्ण और ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ पारित किया जाए, जिसमें सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाना अनिवार्य होगा।
पिटीशनर्स की पैरवी कर रहे एडवोकेट मनीष विजयवर्गीय ने बताया कि ब्यावरा सर्वे नंबर 579 की शासकीय जमीन पर जगदीश पिता प्रेमसिंह पवार, निवासी लसूल्डिया मीना, ने सरकारी रास्ते पर कब्जा कर लिया था। कब्जे का विरोध करने पर पिटीशनर्स सहित आसपास के अन्य भूमि मालिकों को धमकाया जा रहा था। मामले की गंभीरता और लंबे समय से प्रशासन द्वारा कार्रवाई न होने के कारण इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
पिटीशन में प्रमुख सचिव, मप्र शासन, भोपाल संभाग के कमिश्नर, कलेक्टर राजगढ़, एसडीएम एवं तहसीलदार ब्यावरा, नगर पालिका ब्यावरा सहित अवैध कब्जाधारी को पार्टी बनाया गया था। सभी तथ्यों को देखने के बाद कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कलेक्टर निर्धारित अवधि में कार्रवाई सुनिश्चित करे।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़ितों में उम्मीद जगी है कि वर्षों से लंबित इस विवाद का अब कानूनी समाधान होगा।





