रेल यात्रा :- जनरल कोच की भीड भरी यात्रा से यात्री बेहाल …बीना के प्लेटफॉर्म पर घूमते बेखौफ जानवर…
जनरल कोच मे हाट बाज़ार जैसी भीड़…शौचालय की बदबू और गंदगी के ठेर पर बैठा टिकट लेकर चलने वाला यात्री ! अतिरिक्त कोच और सफाई व्यवस्था बेहतर करने की जनकल्याण मेल ने उठाई आवाज

सुरेंद्र मिश्रा मो. 9425381277
भोपाल [जनकल्याण मेल] आज की रेल यात्रा आम जनता के लिए सुविधा नहीं, बल्कि परीक्षा बन चुकी है। विशेष रूप से जनरल कोचों की अव्यवस्था हर दिन नई चुनौती बनकर उभर रही है। यही स्थिति उस समय सामने आई जब आवश्यक कार्य के लिए झेलम एक्सप्रेस में बीना की आपात यात्रा करनी पड़ी।
रानी कमलापति स्टेशन—सौंदर्य चमकदार, पर यात्रियों की पीड़ा छुप नहीं पाती स्टेशन की सुंदरता, स्वच्छता और उज्ज्वल लाइटें मन मोह लेती हैं। पूछताछ काउंटर पर बताया गया कि झेलम एक्सप्रेस समय पर प्लेटफॉर्म क्रमांक तीन पर आ रही है। फोन–पे से 65 रुपये टिकट लेकर स्वचलित सीढ़ियों से प्लेटफॉर्म तक पहुँचना सहज रहा। लेकिन जैसे ही जनरल कोच के दरवाजे पर पहुँचे, उस क्षण से यात्रा की कठिनाई शुरू हो गई।
चार सीट पर सात बैठे, गैलरी में … बैग,बच्चे,महिलाएँ-‘जनरल कोच’ बना चलता-फिरता सब्ज़ी बाजार ..जनरल कोच का दृश्य भयावह था। चार लोगों की सीट पर छह~ सात लोग ठुंसे हुए थे। गलियारे में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और भारी बैगों की भीड़ के कारण खड़े होने तक की जगह नहीं थी। चढ़ने-उतरने वालों की अफरा-तफरी देख ऐसा प्रतीत हुआ जैसे यह रेलवे कोच नहीं, बल्कि भीड़ से भरा कस्बे का सब्ज़ी बाजार हो ..!
लंबी दूरी के यात्रियों का दर्द-“शौचालय तक पहुँचना भी युद्ध जीतने जैसा” पूना से लौट रहे मुरैना निवासी मजदूर सोनू कुशवाह ने बताया –दो दिन से जनरल में सफर कर रहे हैं। शौचालय तक जाना भी युद्ध जीतने जैसा लगता है। अंदर बदबू, गंदगी और पानी का अभाव- सोचकर भी घबराहट होती है।”
एक अन्य यात्री की पीड़ा भी कम नहीं—
“रिजर्वेशन मिलना मुश्किल है। मजबूरी में जनरल में आना पड़ता है। परेशानियाँ हमारी किस्मत बन चुकी हैं।”
खतरे की घंटी– जनरल कोच में सफर अब असुविधा ही नहीं, जोखिम भी यात्रियों के अनुभवों से स्पष्ट है कि जनरल डिब्बों की स्थिति न केवल असहनीय है बल्कि खतरनाक भी हो चुकी है। अत्यधिक भीड़ के कारण किसी भी समय दुर्घटना, चोट या दम घुटने की आशंका बनी रहती है। शौचालय की दुर्दशा और पानी की कमी तो जैसे इस कोच का स्थायी हिस्सा बन चुकी है।
बीना जंक्शन पर आवारा पशुओं का बोलबाला ~ यात्रियों की सुरक्षा पर उठे सवाल बीना जंक्शन, जो इस क्षेत्र का व्यस्ततम रेलवे स्टेशन है, वहाँ एक और बड़ी समस्या सामने आई जब प्लेटफॉर्म पर आवारा पशुओं की मौजूदगी देखी गई। गाय, बैल और कुत्ते प्लेटफॉर्म पर खुले घूमते, दौड़ते और यात्रियों के बीच आते-जाते देखे गए।
ट्रेन के रुकते ही कई पशु सीधे डिब्बों के पास पहुँच जाते हैं। कुछ यात्री उन्हें दुलारते हुए खाने- पीने की चीजें भी देने लगते हैं।
यह दृश्य देखने में भले सहज लगे, लेकिन इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय रेलवे प्रशासन को यात्रियों और पशुओं के इस मिश्रण से उत्पन्न खतरे का तत्काल संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
तत्काल लागू होने योग्य प्रमुख माँगें
1. भीड़ वाले रूटों पर अतिरिक्त जनरल कोच जोड़े जाएँ।
2. सीटिंग व्यवस्था और कोच डिजाइन को सुरक्षित बनाया जाए।
3. शौचालय में सफाई और नियमित पानी सप्लाई की पुख्ता व्यवस्था।
4. सीनियर सिटिजन व बच्चों के लिए अलग कॉरिडोर व्यवस्था।
5. भीड़ नियंत्रण हेतु प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त गार्ड और कर्मचारी नियुक्त हों।
6. प्रमुख रूटों पर ‘जनरल प्लस कोच’ (अर्ध-आरक्षित मॉडल) का विस्तार।
यात्रियों की अंतिम पुकार-“सुविधाएँ बढ़ें, सुधार ज़मीन पर दिखे”
नई ट्रेनों और आधुनिक स्टेशनों का निर्माण सराहनीय है, लेकिन जब तक जनरल कोचों की वास्तविक स्थिति नहीं सुधरेगी, तब तक आम जनता की रेल यात्रा सम्मानजनक नहीं बन सकती।
यात्रियों की माँग स्पष्ट है—
“अतिरिक्त कोच जोड़ें, सफाई व्यवस्था दुरुस्त करें, और यात्रा को सुरक्षित बनाएं।”





