युवा जननायक आकाश राजपूत ने दिया एकता और समरसता का संदेश

हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में गूँजे जयकारे, आस्था और एकजुटता की अनूठी मिसाल

भोपाल [जनकल्याण मेल] बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा दिल्ली से वृंदावन तक निकाली जा रही सनातन हिंदू एकता पदयात्रा के प्रेरक प्रभाव से शनिवार को सागर शहर में सनातन सद्भाव संगठन के नेतृत्व में विशाल सनातन हिंदू एकता पदयात्रा का भव्य आयोजन हुआ। पीटीसी ग्राउंड से प्रारंभ होकर यह यात्रा सिविल लाइन चौराहा, गोपालगंज मुख्य चौराहा होते हुए वृंदावन मठ तक पहुँची। पूरे मार्ग में सागर शहर भक्तिमय रहा। “बागेश्वर धाम सरकार” और “जय श्रीराम” के गगनभेदी जयकारों ने वातावरण को धार्मिक उत्साह से भर दिया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, जल से स्वागत और नारों के साथ यात्रा का अभूतपूर्व स्वागत किया। यात्रा में शामिल हजारों लोगों की आस्था और ऊर्जा ने इसे शहर की अब तक की सबसे अनुशासित और प्रभावशाली पदयात्राओं में शामिल कर दिया।

पदयात्रा में युवाओं के बीच विशेष आकर्षण बने आकाश राजपूत ने कहा कि सनातन हिंदू एकता केवल किसी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और जीवन-मूल्यों का आधार है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, जहाँ-जहाँ सनातन है, वहाँ-वहाँ एकता है, यही हमारी पहचान है। हिंदू एकता कोई नारा नहीं, बल्कि एक परंपरा, एक शक्ति और एक संस्कार है। ‘वासुदेव कुटुम्बकम्’ हमें सिखाता है कि पूरा विश्व हमारा परिवार है।

बागेश्वर महाराज का त्याग हम सब के लिए प्रेरणा :

युवा हृदय सम्राट आकाश सिंह राजपूत ने पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रयासों को नमन करते हुए कहा कि गुरुदेव बागेश्वर महाराज देशभर में सनातन की शक्ति जगाने के लिए कठिन तप, निरंतर यात्रा और अविरत प्रयास कर रहे हैं। न मौसम की परवाह, न थकान का विचार, बस सनातन उत्थान की भावना। उनका यह त्याग हम सभी के लिए प्रेरणा है।

आकाश राजपूत ने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि यदि हम जात-पात, ऊँच-नीच, भाषावाद और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर एक परिवार की तरह आगे बढ़ें, तो भारत अवश्य ही अधिक संगठित, मजबूत और ‘विश्व गुरु’ बनने की दिशा में अग्रसर होगा।

आयोजन में अनेक संगठन एवं कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान :

सनातन सद्भाव संगठन के जिला अध्यक्ष रितेश ठाकुर के मार्गदर्शन में यह आयोजन विशेष रूप से सफल रहा। शहर के अनेक हिंदू संगठनों ने भी सहभागिता निभाई और यात्रा को व्यापक समर्थन दिया। इस यात्रा में सहयोग करने वालों में प्रमुख गोलू घोषी, शुभम घोषी, संतोष राय, मिश्री चंद्र गुप्ता, अनिल सेन, अंकु चौरसिया, अंकित तिवारी, शशांक सिंह राजपूत, राहुल कोसी, कार्तिक तिवारी, जीतू यादव, अमन गौतम, आशीष साहू, अंकित सेन सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, युवक संगठन और स्वयंसेवक शामिल रहे।

ऐतिहासिक रही यह पदयात्रा :

हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और अनुशासित सहभागिता ने इस यात्रा को एक ऐतिहासिक स्वरूप दिया। जिस भाव, भक्ति और एकजुटता के साथ यह यात्रा आगे बढ़ी, उसने सागर की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता की उजली तस्वीर पूरे प्रदेश के सामने रख दी। यह आयोजन न केवल आस्था का पर्व रहा, बल्कि सनातन संस्कृति की उस शाश्वत भावना का दर्शन भी, जो जोड़ती है, संगठित करती है, और समाज को आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है।

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