ब्रह्माकुमार तथा ब्रह्माकुमारी भाई बहनों ने मौन रहकर रतन टाटा जी को श्रद्धांजलि अर्पित की ..

भोपाल [जनकल्याण मेल] राजयोग भवन ब्रह्माकुमारीज अरेरा कॉलोनी क्षेत्रीय कार्यालय में समस्त ब्रह्माकुमार तथा ब्रह्माकुमारी भाई बहनों ने श्रद्धांजलि का कार्यक्रम रखा गया। सभी ने मौन रहकर प्रार्थना की तथा शुभ भावना प्रगट की। राजयोगिनी सरिता बहन जी ने बताया कि
रतन टाटा जी की विशेषताएं अनंत प्रकार से है। आज हम सब यहाँ एक महान आत्मा,एक सच्चे कर्मयोगी,श्री रतन टाटा जी को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए हैं। रतन टाटा जी का जीवन एक ऐसी प्रेरणा है, जो हमें सेवा, समर्पण, और नैतिकता के मार्ग पर चलने की दिशा दिखाती है। उनके निधन से न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने जीवनभर समाज के प्रति अपनी गहरी जिम्मेदारी निभाई।
रतन टाटा जी सिर्फ एक महान उद्योगपति नहीं थे, बल्कि एक संवेदनशील और उदार हृदय वाले व्यक्ति भी थे। उन्होंने व्यापार की दुनिया में ऊँचाइयों को छुआ, लेकिन उनकी सादगी और करुणा उनके व्यक्तित्व को और भी महान बनाती है।
रतन टाटा जी की विशेषताएँ …
उनकी प्रमुख विशेषताओं में विनम्रता, सहानुभूति और दूरदृष्टि का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता था।
1. विनम्रता: रतन टाटा जी ने अपार सफलता हासिल की, लेकिन उनके व्यक्तित्व में कभी भी अहंकार नहीं दिखा। उन्होंने अपने हर कार्य में इंसानियत और सरलता को सर्वोपरि रखा।
2. करुणा: रतन टाटा जी की करुणा और दूसरों की भलाई के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें एक अद्वितीय स्थान दिलाया। उन्होंने हमेशा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की भलाई के लिए काम किया।
3. दूरदृष्टि: उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर सफलता हासिल की। उनकी सोच और निर्णयों ने टाटा समूह को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया, चाहे वह टाटा मोटर्स के रूप में “नैनो” जैसी गाड़ी हो या टाटा स्टील का अधिग्रहण।
टाटा जी से हमें क्या सीखना चाहिए
रतन टाटा जी के जीवन से हम कई महत्वपूर्ण शिक्षाएँ ले सकते हैं, जो न केवल व्यापार के क्षेत्र में, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी हमारे लिए अमूल्य हैं:
1. सेवा का भाव: रतन टाटा जी ने अपने जीवन को समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। हमें उनसे यह सीखना चाहिए कि सफलता केवल खुद के लिए नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए भी समर्पित करना चाहिए।
2. विनम्रता और सम्मान: चाहे कितनी भी ऊँचाई क्यों न छू लें, हमें हमेशा विनम्र रहना चाहिए। रतन टाटा जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि महानता का असली मतलब दूसरों के प्रति सम्मान और सहानुभूति में है।
3. मानवता और नैतिकता: रतन टाटा जी ने यह सिखाया कि व्यापार केवल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का एक माध्यम है। उनकी नैतिकता और मूल्य-आधारित दृष्टिकोण हमें बताता है कि जीवन में सफलता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि नैतिक और मानवीय आधार पर भी होनी चाहिए।
चैरिटी और समाजसेवा 
रतन टाटा जी का सबसे बड़ा योगदान उनके चैरिटी कार्यों में दिखता है। टाटा ट्रस्ट, जिसे उन्होंने नई दिशा दी,आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में अस्पतालों का निर्माण कराया,जहाँ गरीबों और जरूरतमंदों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने कई संस्थानों का समर्थन किया, जिससे बच्चों और युवाओं को बेहतर भविष्य का मार्ग मिल सके।
ग्रामीण विकास के लिए उन्होंने कई योजनाएँ चलाईं, जिससे दूर-दराज के गाँवों में भी प्रगति हो सके और लोग आत्मनिर्भर बन सकें।
रतन टाटा जी का जीवन हमें सिखाता है कि वास्तविक सफलता तब होती है जब हम दूसरों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। उन्होंने अपने चैरिटी कार्यों से यह सिद्ध किया कि दया और करुणा से बड़े से बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण
ब्रह्माकुमारीज के अनुसार, आत्मा अजर-अमर है और रतन टाटा जी की आत्मा अब एक नई यात्रा पर है। उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि इस संसार में केवल कर्म ही हमारे साथ जाते हैं, और उनके महान कर्म उन्हें सदैव अमर रखेंगे।
इस कठिन समय में, हम उनके परिवार और उन सभी के साथ हैं, जो उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते थे। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्मा को शांति मिले और उनके द्वारा किए गए महान कार्य सदैव हमें प्रेरित करते रहें।
रतन टाटा जी की विरासत, उनकी शिक्षाएँ, और उनकी समाज के प्रति सेवाभाव हमेशा हमें मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे।
ओम शांति, ओम शांति,ओम शांति





